PM की अपील से उझानी की सर्राफा मंडी में पसरा मातम, एक हजार परिवारों की थाली से निवाला छिनने का खतरा।
उझानी बदायूं 12 मई।
“बिटिया का रिश्ता पक्का हुआ है, पर अब लग रहा कहीं टूट न जाए… लोग कह रहे सोना नहीं लाओगे?” उझानी के कारीगर सुरेश वर्मा की आंखें नम हैं। प्रधानमंत्री की ‘एक साल सोना न खरीदें’ वाली अपील ने बदायूं की सबसे बड़ी सर्राफा मंडी उझानी में मातम बिछा दिया है। 150 साल पुरानी इस मंडी में पहली बार शादियों के सीजन में ताले लटकने की नोबत नज़र आ रही हैं।
कारीगर रमेश ने बताया कि 3 दिन पहले तक ₹500/दिन, अब ₹50 भी मुश्किल।
कारीगर रमन कुमार फफक पड़ते हैं- “3 बच्चियों का पिता हूं। नथ-बिंदी बनाकर घर चलाते हैं। कल सेठ ने 500 रुपये देकर कहा- अब मत आना। ये 500 में कितने दिन खाएंगे?”।
उझानी से बदायूं, सहसवान , कादर चौक,दातागंज, अलापुर , बिल्सी,बिसौली, कछला, सहित दर्जनों देहात क्षेत्रों तक माल जाता है। मंडी का सालाना टर्नओवर लगभग 100 करोड़ है।
सर्राफा एसोसिएशन अध्यक्ष संजय कुमार मित्तल बोले- “10 मई को PM की अपील आई। 12 मई सुबह तक 90% शादियों की बुकिंग कैंसिल। ₹1.51 लाख तोला सोना वैसे ही मार कर रहा था, अब अपील ने ताबूत में आखिरी कील ठोक दी।”
व्यापारी सिद्धांत गोयल सर्राफ-“पहले 10 तोले की शादी होती थी, अब 3 तोले पर आ गई। अब वो भी बंद। कारीगर का ₹200/ग्राम मेहनताना भी नहीं निकल रहा।”
गृहिणी रेखा गुप्ता, स्टेशन रोड: “मोदी जी ने देश के लिए बोला होगा। पर हमारा देश तो घर से शुरू होता है न? बेटी को खाली हाथ कैसे विदा करें? समाज क्या कहेगा?” इसी डर से उझानी में ‘पुराना गला कर नया बनवाने’ की बुकिंग भी 80% गिर गई। क्योंकि कारीगर वही है, अपील का डर वही है।
बर्तन व्यापारी मोहित गुप्ता बोले -“शादी में सबसे पहले सोना बुक होता है। सोना रुका तो कपड़ा, बर्तन, बैंड, टेंट, हलवाई सब रुक गया। उझानी की 40% इकोनॉमी सर्राफा की चेन पर है। ये ₹100 करोड़ डूबे तो ₹ 400 करोड़ का असर पड़ेगा।”
उझानी पूछ रहा है – देश बचाना है तो क्या गरीब का चूल्हा बुझाकर बचाएंगे?
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राजेश वार्ष्णेय एमके।
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