उझानी में बरसात बनी मक्का के लिए संजीवनी, दलहन-तिलहन की भी चमकी किस्मत।
उझानी, बदायूं 5 मई ।
भीषण गर्मी और सूखे से मुरझा रही मक्का की फसल के लिए सोमवार देर रात हुई झमाझम बारिश संजीवनी साबित हुई है। खेतों में लहलहाते हरे-भरे पौधों को देख किसानों के चेहरे खिल उठे।
पिछले 20 दिनों से बारिश न होने के कारण मक्के के पौधे पीले पड़ने लगे थे। किसानों को सिंचाई का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा था। अब बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी हो गई है, जिससे फसल की बढ़वार तेज होगी और पैदावार बढ़ने की उम्मीद है।

बारिश का फायदा केवल मक्का को ही नहीं मिलेगा। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक उड़द, मूंग और अरहर की बुवाई के तुरंत बाद हुई हल्की बारिश से बीजों का अंकुरण बेहतर होगा। तिलहनी फसलों के लिए भी यह नमी बेहद फायदेमंद साबित होगी। एथेनॉल उत्पादन के लिए सरकार भी मक्का की खेती को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में यह बारिश किसानों के लिए दोहरी खुशखबरी है।
कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि बरसात के मौसम में मक्के की फसल पर दो मुख्य बीमारियों का खतरा रहता है।
पहली बीमारी में मक्के की टहनियों और भुट्टे के पास पानी जैसे धब्बे दिखाई देते हैं। इससे पौधा बढ़ नहीं पाता, भुट्टा छोटा रह जाता है और धीरे-धीरे पूरा पौधा सूखने लगता है।
दूसरी बीमारी मिट्टी से फैलती है। इसमें पत्तियों, टहनियों और बालियों पर छोटी-छोटी धारियां बन जाती हैं जो बाद में फैलकर पूरे पौधे को कमजोर कर देती हैं।

डॉ. कुमार ने सलाह दी कि रोग के लक्षण दिखते ही संक्रमित पौधे को तुरंत उखाड़कर खेत से बाहर फेंक दें। इसे खेत में छोड़ने से बीमारी तेजी से फैलती है। जमीन से सटी हुई सभी पुरानी पत्तियों को तोड़कर हटा देना चाहिए। खेत में पानी न भरने दें और लक्षण दिखते ही कॉपर ऑक्सिक्लोराइड का छिड़काव करें।
खरपतवार रोकथाम के लिए बुवाई के 72 घंटे के अंदर एट्राजीन 600-700 ग्राम प्रति एकड़ 80 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। यदि 25-30 दिन बाद फिर खरपतवार निकल आए तो निराई-गुड़ाई करें या टेम्बोट्रियोन दवा का छिड़काव करें।
वही जिन खेतों में पानी भर गया है, वहां तुरंत निकासी का इंतजाम करें, अन्यथा फसल सड़ सकती है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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