सेवादारों की चिंता अपनी और अपने विकास का सपना ?
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
पिछले कुछ वर्षों का चिंतन करें तो ऐसा लगता है कि बदायूं में विकास की रेल रूकने का नाम नहीं ले रही है पर सच है कि स्टापेज बदायूं में नहीं है और उसका कारण सेवादारों की अपनी पार्टी में चलने वाली गुटबाजी उनके काम से कहीं ज्यादा गति से चल रही है। आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप इसका परिणाम सहन कर चुके हैं जो लोकसभा चुनाव में उन्हें उनके अपनों ने पराजित होने को मजबूर कर दिया। समाजवादी पार्टी की तरफ निगाह डाले तो हर शाख पर विकास का परिन्दा नजर आता है लेकिन क्षेत्र और अपनी पार्टी की ओर देखने की फुरसत किसी के पास नहीं हैं, जनपद से विधानसभा चुनाव में सपा के तीन विधायक जीते थे पर लगता है अब दो रह गए हैं लेकिन सपा से दूर होने का कारण क्या है कोई नहीं देखता। सपा के विधायक एक विधायक और पूर्व मंत्री के बीच चल रही जंग को सपा का हाईकमान चुपचाप देख रहा है जिससे ऐसा लगता है कि तलवारें उनके इशारे पर चल रही है। भाजपा की तरफ देखें तो ऐसा लगता है कि विधानसभा चुनाव में जीतने वाले सेवादार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की लोकप्रियता से जीते और आने वाले चुनाव में उसी रास्ते से चुनाव वैतरणी को पार लगायेंगें। भाजपा वालों के पास यह देखने की फुरसत नहीं है कि पार्टी में गुटबाजी सिर चढकर क्यों बोल रही है और कौन – कौन पार्टी से दूर होने को मजबूर हो गया है।
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