बीते कल की शान बुलेट जो आज बनी सिरदर्द बुलेट ?
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
एक जमाना था जब बुलेट को वर्दी वाले महकमें में शान की सवारी का गौरव प्राप्त था और हालत यह होती थी कि बुलेट की आवाज सुनकर डयूटी करने वाले वर्दीधारी सतर्क हो जाते थे क्योंकि उनको लगता था कि बुलेट पर स्टार वाले साहब आ रहे होगें। हालाकि उस समय समय भी कुछ लोग निजी बुलेट की सवारी किया करते थे और इसी के चलते बुलेट की सवारी करने वालों को प्रभावशाली पहचान मिली हुई थी। बीते कुछ समय बुलेट बाजार से लगभग गायब सी हो गई और पिछले समय में नई पहचान और वही शान के साथ मैदान में आई लेकिन तब की बुलेट और अब की बुलेट में बहुत बडा फर्क आ गया है आज बुलेट की आवाज सुनाई देने पर वर्दी वालों के कान खडे हो जाते हैं क्योंकि इसमें लगाया गया पटाखे जैसी आवाज करने वाला विशेष सायरन शासन द्वारा प्रतिबंधित है और पटाखे वाली आवाज निकालने वाले वाहन पर बडा जुमाना किए जाने का प्रावधान है। बस यही कारण है कि बीते समय शान की सवारी कही जाने वाली बुलेट को वर्तमान समय में जगह – जगह डयूटी देने वाले वर्दीधारी रोक लेते हैं और बुलेट की चैकिंग करने में बुलेट सवार को पसीना – पसीना करने करने की राह बना देते हैं।
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