बदायूं में अवैध नर्सिंग होम का जाल: बिना रजिस्ट्रेशन धड़ल्ले से चल रहे अस्पताल, मरीजों की जान से खिलवाड़।
बदायूं, 2 मई।
जिले में अवैध अस्पतालों और नर्सिंग होम की बाढ़ आ गई है। बिना रजिस्ट्रेशन, बिना डिग्री और बिना जरूरी मानकों के चल रहे ये अस्पताल लोगों की जान के लिए खतरा बन गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद भी अवैध नर्सिंग होम दोबारा खुल रहे हैं।——–
ताबड़तोड़ कार्रवाई, फिर भी नहीं लग रही लगाम।
उझानी में आशीर्वाद हॉस्पिटल की OT सील
नगर निवासी अरविंद कुमार की शिकायत पर उस समय ACMO रहे डॉ. मोहन झा ने छापा मारा।
जांच में अस्पताल प्रबंधन रजिस्ट्रेशन का कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाया।
ACMO ने ऑपरेशन थिएटर सील कर संचालक को नोटिस जारी किया। इसी तरह आशा नर्सिंग होम को भी सील किया गया कुछ समय बाद फिर से संचालित हो रहा है।
ACMO ने चेतावनी दी कि जवाब न मिलने पर FIR दर्ज होगी,आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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नवादा इलाके का ‘सायरा अस्पताल’ सील।
अस्पताल डॉ. अंकित पुरोहित की डिग्री पर चल रहा था, जबकि डॉक्टर ने लिखित में अपने प्रमाण पत्र हटा लिए थे।
रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन अनुमति नहीं मिली।
फिर भी मरीज भर्ती कर इलाज चल रहा था। स्वास्थ्य विभाग ने सील कर मरीजों को जिला अस्पताल भेजा।
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शेखूपुर में स्टाफ नर्स के घर अवैध अस्पताल, जच्चा-बच्चा की मौत।
सरकारी स्टाफ नर्स अपने घर में अवैध नर्सिंग होम चला रही थी।
प्रसूता को आशा PHC पर लाई, लेकिन नर्स उसे घर ले गई जहां प्रसव के दौरान मां-बच्चे की मौत हो गई।
मामला DM और मुख्यमंत्री तक पहुंचा। जांच के बाद नर्स को बर्खास्त कर दिया गया
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सहसवान का चर्चित अस्पताल, जांच में पुरुष के बच्चेदानी दिखा देना, जांच हुई एसीएमओ डॉ निरंजन सिंह गये लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिफर।
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कादरचौक का ताजा मामला,पेट पर जोर लगाकर डिलीवरी कराना, नवजात की मौत, एमओआईसी का निकला राधा नर्सिंग होम कार्रवाई खानापूर्ति।
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कैसे चल रहा मौत का खेल ?
यूनानी-आयुर्वेदिक की अनुमति, चला रहे नर्सिंग होम, BUMS, BAMS डिग्री वाले डॉक्टर एलोपैथिक इलाज और सर्जरी तक कर रहे हैं।
फर्जी डिग्री का खेल। घनश्यामपुर के ‘मां इमरजेंसी हॉस्पिटल’ में फर्जी डिग्री के आधार पर इलाज हो रहा था। छापा पडने पर सभी डॉक्टर फरार हो गए।
बिना बिल, बिना मानक अवैध अस्पतालों के पास रजिस्ट्रेशन, प्रदूषण नियंत्रण और अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र नहीं हैं। बायोमेडिकल नियमों का उल्लंघन हो रहा है, मरीजों को बिल भी नहीं दिए जाते
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एक दिन में 2 नवजात और प्रसूता की मौत। दहगवां के जरीफनगर स्थित माहेश्वरी नर्सिंग होम में एक दिन में प्रसूता के साथ नवजात की मौत हो गई, कार्रवाई शून्य।
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स्वास्थ्य विभाग का दावा vs हकीकत
CMO डॉ. श्री मोहन झा के आदेश पर अवैध अस्पतालों को सील करने की कार्रवाई हो रही है। नोडल अधिकारी ने बताया कि बिना वैध दस्तावेजों के नर्सिंग होम का संचालन नहीं होने दिया जाएगा।
लेकिन हकीकत ये है कि जिले में अवैध अस्पतालों की भरमार है और आए दिन किसी न किसी की जान जा रही है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई होती है, लेकिन कई बार स्थानीय दबाव या जानकारी के अभाव में मामले लंबित रह जाते हैं।——–
क्या कहते हैं आंकड़े।
स्वास्थ्य विभाग ने पिछले 3 महीने में 35 से ज्यादा अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई की है, फिर भी धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं।
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जनता से अपील
किसी भी अस्पताल में भर्ती होने से पहले CMO कार्यालय से रजिस्ट्रेशन जरूर चेक करें।
डॉक्टर की डिग्री और अस्पताल का लाइसेंस मांगें।
इलाज का पक्का बिल लें।
अवैध अस्पताल दिखे तो CMO हेल्पलाइन 104 या DM कार्यालय में शिकायत करें।
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बदायूं में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध नर्सिंग होम संचालकों के मन में स्वास्थ्य विभाग का डर नहीं है। जब तक सख्त कार्रवाई और निगरानी नहीं होगी, तब तक मरीजों की जान से खिलवाड़ होता रहेगा।
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