बुद्ध पूर्णिमा -कछला गंगाघाट पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी।
उझानी बदांयू 1 मई।

बुद्ध पूर्णिमा पर कछला गंगाघाट आज सुबह से शाम तक श्रृद्धालुओं की आस्था से सराबोर रहा। हजारों की संख्या में जुटे श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर पहले सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया, फिर घाट पर गंगा मईया की पूजा-अर्चना की। पुरोहितों से हवन भी कराए। आहुतियों के दौरान घाट पर मंत्र भी गूंजते रहे।
गंगास्नान का दौर शाम तक चला। गंगाघाट पर श्रद्धालुुुओं के पहुंचने का सिलसिला शुक्रवार तड़के से ही शुरू हो गया। ब्रह्ममुहुर्त में संत पुरोहितों के अलावा श्रृद्धालुओं ने भी हर-हर गंगे बोलकर डुबकी लगाई।
डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने पूजन किया। गंगा किनारे के घाटों पर खासी भीड़ दिखी। कासगंज जिले के छोर वाले घाट पर सबसे ज्यादा भीड़भाड़ रही। घाटों पर हर-हर गंगे गूंजता रहा।
कई श्रद्धालुओं ने घाट पर ही कन्या भोज, ब्राह्मणों को भोजन कराने के अलावा भंडारे का आयोजन किया। आश्रमों में धार्मिक कार्यक्रम हुए। धार्मिक अनुष्ठान कराने के बाद श्रद्धालुओं ने संतों को दान-दक्षिणा भेंट की।

घाट के आसपास लगे मेला में बच्चों ने खेलकूद का लुत्फ उठाया। महिलाओं ने मीना बाजार में घरेलू और शृंगार के सामान की खरीदारी की। पंडित दिनेश चंद्र पाठक ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने से अन्य के मुकाबले कई गुना अधिक पुण्य अर्जित होता है। घाट पर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर एसडीएम सदर मोहित कुमार के अलावा प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार की मौजूदगी में पुलिस और राजस्व कर्मचारी लगे रहे।
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कछला गंगाघाट पर हाथरस जिले के कस्बा सिकन्दराराऊ निवासी सुरेश चंद्र ने गंगा में डुबकी लगाने से पहले थैला घाट किनारे तख्त पर रख दिया। थैला में उसके कपड़े और पर्स भी था। स्नान कर वह बाहर निकले तो थैला गायब मिला। पर्स में करीब एक हजार रुपये थे, सुरेश ने आसपास के दुकानदारों से पूछा भी लेकिन थैले के बारे में पता नहीं लग पाया। गनीमत रही कि पहने हुए कपड़े थैले से बाहर रखे थे, स्नान कर वहीं पहनने पड़े, वर्ना बिना कपड़े ही घर जाना पडता। सुरेश ने घाट पर मौजूद पुलिस कर्मियों को भी अवगत करा दिया ।
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