4:54 am Monday , 20 July 2026
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वजीरगंज मेला संकट में! झूला विवाद ने बढ़ाई खींचतान, आस्था के केंद्र पर मंडराया खतरा

“वजीरगंज मेला संकट में! झूला विवाद ने बढ़ाई खींचतान, आस्था के केंद्र पर मंडराया खतरा”

वजीरगंज, बदायूं।
चैत्र मास की पूर्णमासी से ऊंचे टीले पर लगने वाला पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक एवं चमत्कारिक श्री राजराजेश्वरी मां मंगला माता का मेला इस बार विवादों के साए में घिर गया है। नगर पंचायत प्रशासन के अधीन आयोजित यह मेला वर्षों से आस्था, श्रद्धा और भव्यता का प्रतीक रहा है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु माता के दरबार में हाजिरी लगाकर मनोकामनाएं मांगते हैं और मेले में खरीदारी के साथ-साथ झूले, चरखी, मौत का कुआं व अन्य मनोरंजन के साधनों का आनंद उठाते हैं।

लेकिन इस बार मेले की रौनक पर विवाद का ग्रहण लग गया है। जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत प्रशासन द्वारा पहले एक झूला संचालक को डेढ़ लाख रुपये की रसीद जारी कर मेले में झूला लगाने की अनुमति दी गई। वह संचालक अपनी तैयारियों के साथ मेले में पहुंच भी गया, लेकिन इसी बीच दूसरे झूला संचालक से कथित तौर पर अधिक धनराशि लेकर उसके नाम भी रसीद काट दी गई। इसके बाद पहले संचालक को झूला लगाने से रोक दिया गया।

बताया जाता है कि पीड़ित संचालक न्याय के लिए अदालत तक गया, लेकिन वहां से भी उसे निराशा हाथ लगी। इसके बाद दूसरे संचालक ने मेले में झूले, मौत का कुआं समेत अन्य साधन स्थापित कर लिए और श्रद्धालुओं से भारी शुल्क वसूले जाने की शिकायतें सामने आने लगीं। यहीं से मेला अध्यक्ष और झूला संचालक के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया।

इस वर्ष मेले की अध्यक्षता वार्ड नंबर 2 की सभासद सावित्री देवी को सौंपी गई है। उन्होंने थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया है कि मेले में लगाए गए झूलों के मुख्य द्वार पर तैनात लेडीज बाउंसर महिलाओं और आम लोगों के साथ अभद्र व्यवहार कर रही हैं। शिकायत करने पर झूला प्रबंधन द्वारा गाली-गलौज और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का भी आरोप लगाया गया है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है।

वहीं, एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। वीडियो में कथित रूप से नगर पंचायत अध्यक्ष के पुत्र के साथ अभद्र व्यवहार और पहचान पत्र फाड़े जाने की बात सामने आ रही है, जिससे स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

दूसरी ओर, झूला संचालक ने भी मेला अध्यक्ष पक्ष पर मारपीट और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है। दोनों पक्षों के बीच चल रही इस खींचतान ने मेले के शांतिपूर्ण माहौल को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी प्रकार मेले में मनोरंजन के साधनों के नाम पर मनमानी वसूली और विवाद चलते रहे, तो आने वाले समय में इस ऐतिहासिक मेले की पहचान और अस्तित्व दोनों खतरे में पड़ सकते हैं। आम श्रद्धालु महंगे टिकटों के चलते झूलों का आनंद नहीं ले पा रहा और केवल दूर से तमाशा देखने को मजबूर है।

यदि समय रहते प्रशासन ने इस पूरे मामले में सख्त और निष्पक्ष हस्तक्षेप नहीं किया, तो वजीरगंज का यह ऐतिहासिक मेला अपनी भव्यता खोकर केवल विवादों का केंद्र बनकर रह जाएगा—जो न केवल आस्था, बल्कि स्थानीय परंपरा के लिए भी गंभीर संकट का संकेत है।

(अनुराग मिश्रा, वजीरगंज)

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