राजनंतिक दलों ने बना दी बदायूं की यह पहचान ?
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं में राजनेतिक दलों की कार्यप्रणाली को देखकर ऐसा लगता है कि उनकी निगाह में बदायूं ऐसा जिला है जहां दरिया बिछाने और जयकारा लगाने वालों का अथाह भंडार है और यहां के लोगो के बीच आपसी मतभेद की दुखती नस को भी राजेनतिक दलों ने अच्छी तरह पहचान कर ली है राजनेतिक दल के हाइकमान को पता है कि अंग्रेज भले हिन्दुस्तान से चले गए हों लेकिन बदायूं में गुलामी करने एवं उन लोगों की कोई कमी नहीं है जो अपने विरोधी को फंसाने के लिए अपनी रकम और अपनी फसल में आग लगाने को तैयार रहते हैं। घर को जोगी जोगना और आन गांव को सिद्ध की कहावत पर चलने वालों की संख्या प्रचुर मात्रा में मिलते मिलती है। यही कारण है कि तमाम राजनेतिक दल बदायूं में बाहर के रहने वाले लोगों को अपना उम्मीदवार बनाकर बदायूं के मतदाताओं की ताकत से मौज उडाते हैं और अपनों की कद्र ना करने वाले बदायूं वाले तालियां बजाकर और नेता जी के साथ अपनी फोटो खिचवकर खुश हो जाते हैं।
यही कारण जो आज साहित्य, गंगा जमुनी संस्कृति और आपसी सहयोग तथा पूरेविश्व में मशहूर पेडे की जगह बदायूं की पहचान केवल वोट बैंक तक सीमित होकर रह गई है।
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