बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
सात दशक तक मिलने वाले तमाम आश्वासन, वायदों और कोशिश की बाते सुनने के बाद आज आखिर दिल्ली वाली रेल की बात को सुनने का वह वक्त सामने आ गया जिसको लेकर बदायूं वाले सात दशक तक प्यासे चातक की तरह लटके हुए थे। आजादी के बाद के सात दशकों में बदायूं वालों ने किस – किस के वायदे सुने, किस – किस की कोशिश देखी, किस – किसके आश्वासन सुने उनमें बदायूं के वह तमाम पालनहार शामिल हैं जो बदायूं को स्वर्ग से सुन्दर बनाने का सपना दिखाते थे लेकिन कोई काम कराना तो दूर लौट के दर्शन देने की जगह क्षेत्र में तीन दिवसीय दौरा कार्यक्रम लगाते थे, अपने वोट बैंक और समर्थकों तथा चहेतों के सुख और दुख में शामिल होने में अपना पूर्व निश्चित समय पूरा करके अपने इलाहबाद, शाहजहांपुर, कुशीनगर और दिल्ली चले जाते थे। यही बात थी कि बदायूं वालों को अपने सांसद की भूमिका का अहसास कभी नहीं हुआ। पहली बार धर्मेद्र यादव ने बदायूं वालों को इस बात का अहसास दिलाया कि सांसद चाहे तो मेडीकल कालिज, ओवरब्रिज, बाइपास, क्षेत्र में स्कूल और कालिज की स्थापना, ग्रामीण अंचलों में विद्युतीकरण कराने के साथ सरकारी योजनाओं को क्षेत्र में लाने के साथ नागरिकों के सुख और दुख ध्यान रख सकता है चाहे उसके अपने उसके हर कदम और हर मोड पर उसका कितना ही विरोध कर रहे हों और वर्तमान में बदायूं से राज्यसभा सासंद बनने के बाद केंद्र सरकार में मंत्री बने बीएल वर्मा इस बात का बदायूं वालों को अहसास करा रहे हैं कि मंत्री बनने के बाद आम आदमी के बीच कैसे रहा जाता है और मन से जब जो ठान लिया जाये वह काम पूरा करने का रास्ता अपने आप बनता चला जाता है। केंद्रीय मंत्री श्री वर्मा के प्रयास से इस सप्ताह में दिल्ली ट्रेन के अलावा एक ट्रेन उझानी में स्टापेज कराने की सफलता प्राप्त की जो जनता के प्रति एक दायित्व और पूरा करने की कहानी बना रहा है। पर कहते हैं जितना करेगें उतनी उम्मीदें बढेगी अब बदायूं के आम आदमी की केंद्रीय मंत्री श्री वर्मा से दिल्ली के बाद लखनउ वाली रेल शुरू कराने की उम्मीद होने लगी है।
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