बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं की पराग दूध फैक्ट्री को किसकी नजर लगी यह तो पता नहीं परंतु यह बात सच लगती है कि राजनेतिक परिवार के संरक्षण के चलते सोने का अंडा देने वाली पराग दूध फैक्ट्री को भ्रष्ट अफसरशाही के चलते ठिकाने लगाने के बाद बंद करके चैन की सांस ली। पराग दूध फैक्ट्री के चलने से सैकडों समितियां चल रहीं थी, दुग्ध उत्पादक किसानों की आय का साधन बना हुआ था जो आज तक लाइन पर नहीं आ पा रही। वैसे तो इससे पूर्व बदायूं के शेखूपुर की किसान चीनी मिल भी दो बाद राजनेतिक संरक्षण के चलते बंदी के कगार पर पहुंच चुकी है लेकिन गनीमत यह है कि चल रही है। अब बात करते हैं सैजनी के प्लांट की जो दो अधिकारियों की हत्या के उपरांत सुर्खियों में चल रहा है उसमें भी राजनेतिक संरक्षण की कहानी हर गली और हर चौराहे पर सुनाई दे रही है जबकि बदायूं में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना से बना बदायूं का राजकीय मेडीकल कालिज सोशल मीडिया में सुर्खियों का कारण बना हुआ है और वह चर्चाएं दिल को दहलाने वाली बन रहीं है। मेडीकल कालिज की चर्चाओं की कहानी को देखें तो उनमें राजकीय मेडिकल कालिज बदायूं में राजनीतिक परिवारों के दबंग चहेते संविदा पर कार्यरत हैं जो मेडीकल कालिज में किसी दिन बड़ी घटना की कहानी बनाने और एक नया सिरदर्द सामने लाने का कारण बन सकती हैं। लोगों को लगता है कि वैसे भी सैजनी कांड के बाद कोई बड़ा डॉक्टर राजकीय मेडिकल अधिकारी बदायूं में आना पसंद नहीं करेगा, हो सकता हैं ज्वाइन नहीं करेगा, नौकरी से इस्तीफा देगा क्योंकि बदायूं का नाम पूरे हिंदुस्तान में सुर्खियों में छाया हुआ है। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन को राजकीय मेडिकल कॉलेज में पुलिस चौकी की स्थापना करने पर विचार करना चाहिए और स्थानीय राजनेतिक परिवारों के दबंग चहेतों को चिन्हित करके मेडीकल कालिज को उनसे मुक्ति दिलाने की योजना देखना चाहिए क्योंकि राजनेतिक परिवारों के चहेते दबंग राजकीय मेडिकल कॉलेज की हालत को सुधरने नहीं देगें और किसी बडी घटना के सामने आने से पूर्व मेडीकल कालिज में पुलिस चौकी की स्थापना करने की बात प्रशासन को संज्ञान में लेना चाहिए।
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