2:09 am Tuesday , 21 July 2026
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बाहर के रहने वाले राजनेतिकों के चालीस साल, बदायूं हो रहा है बदहाल ?

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं से बाहर के रहने वाले राजनेतिकों की राजनीति का श्रीगणेश 1984 के लोकसभा में उस समय सामने आया जब कांग्रेस के उम्मीदवार इलाहबाद निवासी सलीम इकबाल शेरवानी बदायूं के सांसद बने। 1989 में उनको कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया और बदायूं सीट से लोकसभा चुनाव में जबलपुर निवासी दमकिपा उम्मीदवार शरद यादव सांसद बनकर प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार में केंद्रीय मंत्री बने जबकि अगले लोकसभा चुनाव से पूर्व श्री शेरवानी सपा में शामिल होकर बदायूं संसदीय सीट से सपा के उम्मीदवार बनकर बदायूं के सांसद बने और प्रधानमंत्री एचडी देवगोडा एवं इंद्र कुमार गुजराल की सरकार में मंत्री बने थे। इस बीच बदायूं संसदीय सीट से शाहजहांपुर निवासी स्वामी चिन्मयानंद और सैफई निवासी धर्मेंद्र यादव तथा कुशीनगर निवासी डा संघमित्रा मौर्य और पिछले चुनाव में सैफई निवासी आदित्य यादव बदायूं के सांसद बने। आम आदमी को लगता है कि 1984 से 2024 तक के चालीस वर्ष में सांसद धर्मेंद्र यादव का समय बदायूं के विकास का समय बनकर उभरा जबकि बाकी सांसद बदायूं के सांसद तो बने लेकिन बदायूं के पालनहार नहीं बन सके जिसके चलते बदायूं के विकास को वह गति नहीं मिल पाई जो मिलना चाहिए थी। आम आदमी को तो ऐसा लगने लगा है कि एक राजनेतिक दल ने बदायूं संसदीय सीट को प्रयोगशाला और दूसरे दल ने उपयोगशाला सा बनाकर रख दिया है और बदायूं के मतदाता प्रयोगशाला और उपयोगशाला की शतरंज में मोहरा सा बनकर मात खाने को मजबूर हो रहे हैं।

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