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फास्ट-फूड की बढ़ती खपत, स्वास्थ्य के लिए धीमा जहर

उझानी- बदांयू 7 जनवरी।

जिले के शहरी बाजार हो या फिर गांव-कस्बे हर जगह रंगीन और मिलावटी चटनी से बने खाद्य पदार्थों की भरमार है। फास्टफूड मेंं धड़ल्ले से रंगों का इस्तेमाल हो रहा है। वहीं, चमकदार दिखने वाली बिरयानी भी सेहत के लिए धीमा जहर है। इनके सेवन से न सिर्फ संक्रमण का शिकार हो सकते हैं, बल्कि त्वचा के साथ अन्य बीमारी भी घेर लेंगी। शहर के फुटपाथ और सड़क पटरियों पर सजी दुकानों पर युवाओं की भीड़ लगी रहती है।

बता दें कि हाल ही में अमरोहा में 16 वर्षीय बालिका की मौत की वजह मोमोज, चाऊमीन, बर्गर बने थे। यह परेशानी बच्चों में तेजी से पनप रही है। कारण, बच्चे बड़े ही चाव से ऐसे फूड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो बीमारी का घर है। बावजूद इसके विभाग अभी संजीदा नहीं हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में हर तीसरे बच्चे में फास्ट फूड की वजह से पेट की बीमारी मिल रही है। आंतों में संक्रमण तक हो रहा है।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके गुप्ता ने बताया कि फास्टफूड में सिंथेटिक रंग, केमिकल और मैदा की अधिक मात्रा से पेट में विकार बढ़ रहे हैं। पेट में दर्द, सूजन, अपच, भूख कम लगने की शिकायत मिल रही है। इनमें पांच फीसदी बच्चे ऐसे हैं जो फास्ट फूड और बाजार का भोजन अधिक कर रहे हैं। पूछताछ में पता चला कि ये सप्ताह में तीन से चार दिन फास्ट फूड खाते हैं। इसमें पेट में अल्सर, आंत में संक्रमण, सूजन हो रही है।

— चिकित्सकों के अनुसार, फास्टफूड में स्वाद के लिए केमिकल और रंग मिलाए जाते हैं। फाइबर युक्त भोजन की कमी हो रही है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता घट रही है। बच्चे हरी सब्जी व अन्य पौष्टिक भोजन से बचते हैं, जिससे कुपोषित भी हो रहे हैं। साफ-सफाई में कमी से डायरिया भी होता है।

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चिकित्सकों की सलाह- बच्चों को हरी सब्जी, फल, सलाद खाने पर जोर दें। हरी सब्जी से बच्चों के लिए घर पर पसंदीदा सामग्री बनाएं। स्कूलों में कैंटीन में फास्टफूड पर सख्ती से रोक लगाई जाए। खाद्य विभाग फास्टफूड की गुणवत्ता के लिए सैंपलिंग लें।
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राजेश वार्ष्णेय एमके

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