बिसौली- सिद्व बाबा इंटर कालेज शरह बरौलिया के मैदान पर चल रही राम कथा के छठे दिन शनिवार को कथा व्यास प्रेममूर्ति पंकज मिश्र ने राम वनवास व राम केवट संवाद की मनोहारी व्याख्या की। इस दौरान उन्होंने कहा कि जब आप दूसरे की मर्यादा को सुरक्षित रखेंगे तभी आपकी मर्यादा सुरक्षित रह सकेगी।भगवान राम चौदह वर्ष वनवास के लिए सीता और लक्ष्मण के साथ गंगा घाट पर पहुंचे और केवट से गंगा पार करने के लिए नाव मांगा तो केवट ने कहा, मैं तुम्हारे मर्म जान लिया हूं चरण कमलों की धूल के लिए सब लोग कहते हैं वह मनुष्य बना देने वाली कोई जड़ी है। पहले पांव धुलवाओ फिर नाव पर चढ़ाऊंगा। कथा व्यास प्रेममूर्ति पंकज मिश्र ने कहा कि जिससे पूरी दुनिया मांगती है आज गंगा पार जाने के लिए दूसरे से मदद मांग रहे हैं, जो सारे सृष्टि को तीन पग में नाप सकता है, क्या वह पैदल गंगा नहीं पार कर सकता। भगवान दूसरों की मर्यादा को समझते हैं, वैसे ही घाट की एक मर्यादा होती है। भगवान केवट के पास इसलिए आए कि वह हम लोगों से कहना चाहते हैं कि हम लोग बहुत बड़े बड़े लोगों के दरवाजे पर उनके सुख-दुख में जाते रहते हैं। भगवान कहना चाहते हैं कि हमें कभी छोटे लोगों के यहां भी जाना चाहिए। राम केवट कथा सुनने से हमें यह सीख लेनी चाहिए। कथा को भाव व प्रेम से सुनने वाले ही ज्ञान प्राप्त करते हैं। रामायण का मुख्य रस करुण वास्तव में हृदय में करुणा आ जाए तो वीरता और पराक्रम की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इस अवसर पर सत्यदेव मिश्रा,रामबहादुर,शंखधार विनीत कटिया,शिशु पाल शर्मा,रविन्द्र शर्मा,संजय उपाध्याय शैलेश पाराशरी,श्री कृष्ण फूल माली,विवेक काकुष्ठ,आयुष शर्मा,नीरज शर्मा,शिवि शर्मा,पूनम,राम बेटी शर्मा,चन्द्रवती,सुधा पाठक,किरण सिंह आदि उपस्थित रहे

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