6:01 am Monday , 20 July 2026
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बिसौली। हाजी बाबा खानकाह में अली डे के मौके पर एक महफ़िल का आयोजन

बिसौली। हाजी बाबा खानकाह में अली डे के मौके पर एक महफ़िल का आयोजन किया गया। महफ़िल में शायरों और नोहाख्वानों ने हजरत अली की शान में मनकबत और कलाम पेश किए। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।
महफ़िल की शुरुआत तिलावत ए कुरआन से हुई। निजामत अभीक्ष पाठक आहत ने की। मशहूर शायर मशहूद खां हमदम बिसौलवी ने अली की शान में कुछ यूं कहा मिदअत अली की, और जुवां इस गुलाम की। हर गाम जरूरत है, जहां एहतराम की।। उल्फत है मुस्तफा से, अली से गुरेज है। तौहीन हो रही है, खुदा के कलम की। अभीक्ष पाठक आहत ने कुछ इस अंदाज में पढ़ा तुम्हारे बिन अभी तक जी रहे हैं। हलाहल ज़िंदगी का पी रहे हैं। मशकूर नज़मी ने अली डे को इस अंदाज में कहा इब्तिदा जनवरी की यूं अच्छी लगी, ये रजब पड़ गई है नये साल में। मदहे मौला इबादत है मौलाई की, जश्ने मौला अली है नये साल में।। महफ़िल में डा. अमीरउद्दीन अमीर, माजिद सलमानी, सूफी जरीफ अश्क, फहीम बिसौलवी, आलम बेग, हमजा बिसौलवी, फरीद इदरीसी, श्रीदत्त मुजतर ने भी अपने अपने कलाम पेश किए। इस अवसर पर मन्नू, अहकम खान, रम्मू खान, मूसा, दानिश, ओसाफ़ खान आदि मौजूद रहे।

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