उझानी बदांयू 21 सितंबर।
सामान रखकर भूलना नाम, पता और नंबर तक याद नहीं रहना, यह कोई सामान्य बात नहीं है। यह गंभीर बीमारी के लक्षण हैं। 60 साल की उम्र के बाद याददाश्त कमजोर हो जाती है। आजकल युवाओं में भी भूलने की बीमारी बढ़ रही है। इसे नजरअंदाज न करें। इसमें समय पर इलाज जरूरी
आज विश्व अल्जाइमर दिवस है। शहर के निजी और सरकारी अस्पतालों में अल्जाइमर से ग्रसित हर महीने 40 से 50 मरीज आ रहे हैं। अल्जाइमर एक प्रकार की दिमागी बीमारी है, जिसे हम आम भाषा में भूलने की बीमारी भी कह सकते हैं। 60 वर्ष से अधिक की लगभग पांच प्रतिशत आबादी याददाश्त की कमी से पीड़ित है। याददाश्त की कमी के साथ सोचने व प्रतिदिन के व्यवहार की क्षमता भी प्रभावित हाेती है।
गोल्ड मेडलिस्ट डॉ संजीव गुप्ता ने बताया कि इस बीमारी का अब तक काेई सटीक इलाज नहीं है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव करके कुछ हद तक बीमारी से बचा जा सकता है। 60 वर्ष की उम्र के बाद अल्जाइमर बीमारी के लक्षण प्रकट होते हैं।
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बीमारी के लक्षण
मरीज की याददाश्त का कमजोर होना। कुछ घंटे बीते समय की बातें याद न रहना।
जरूरी दस्तावेज या फिर पैसे कहीं रखकर भूलना।
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बचाव के उपाय –
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ प्रभाकर मिश्रा ने बताया कि बुजुर्गों को कभी भी दिमागी तौर पर खाली नहीं बैठना चाहिए। पर्याप्त नींद लें, कम से कम छह से आठ घंटे की। लेखन, पुस्तकें पढ़ना, संगीत सुनना, गाने गाना को नियमित रूप से समय दें। रोजाना लूडो, शतरंज जरूर खेलें।
पार्क में घूमना-फिरना जरूरी है।
संतुलित आहार व हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन जरूर करना चाहिए।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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