
उझानी की बेटी ने बढ़ाया प्रदेश का मान,आर्टिस्ट शगूफी को मिला “वुमन आइकॉन इंटरनेशनल अवार्ड
शगूफा आर्ट एकेडमी के जरिए हजारों महिलाओं को दिया कला का आत्मविश्वास।
उझानी-बदांयू 2 अगस्त।
कला सिर्फ रंग और कैनवास नहीं, बदलाव का जरिया भी बन सकती है — यह साबित किया है बदायूँ जनपद की उझानी के मोहल्ला नझियाई निवासी असरार अहमद व नियाज बानौ की बेटी आर्टिस्ट शगूफी ने। कला एवं रचनात्मकता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ” इंटरनेशनल वुमन आइकॉन अवार्ड 2026″ से सम्मानित किया गया है।
यह अवार्ड उन महिलाओं को दिया जाता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण प्रतिभा, समर्पण और रचनात्मकता से समाज में एक प्रेरणादायक पहचान बनाई है।
शगूफी पिछले कई वर्षों से “शगूफा आर्ट एकेडमी” के माध्यम से विद्यार्थियों, महिलाओं और कला-प्रेमियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। उनका मकसद सिर्फ कला सिखाना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को उसकी छिपी प्रतिभा पहचानने और आत्मविश्वास के साथ खुद को अभिव्यक्त करने में मदद करना है।
एकेडमी से प्रशिक्षित कई छात्राओं ने आज राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। शगूफी मानती हैं “कला अभिव्यक्ति का माध्यम भर नहीं है। यह व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त औजार है।
आर्टिस्ट शगूफी एक ही विधा तक सीमित नहीं हैं। वे मूर्तिकला, इंटीरियर डिजाइनिंग, पोर्ट्रेट आर्ट, इस्लामिक कैलीग्राफी, लिप्पन आर्ट, म्यूरल आर्ट, लोक कला, कैनवास पेंटिंग, टेक्सचर आर्ट, फैब्रिक पेंटिंग और क्ले आर्ट जैसी एक दर्जन से अधिक विधाओं में निपुण हैं।
उनकी अनूठी कला-योजनाओं और नवोन्मेषी प्रयोगों के चलते उन्होंने एक वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है। यह उपलब्धि उनकी मेहनत और जुनून का सबसे बड़ा प्रमाण मानी जा रही है।
“वुमन आइकॉन अवार्ड 2026” उनके इसी समर्पण और समाज सेवा का सम्मान है। उझानी जैसे छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली शगूफी की कहानी आज हर महिला और युवा कलाकार के लिए मिसाल बन गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शगूफी ने साबित किया कि दृढ़ संकल्प, निरंतर सीखने की ललक और रचनात्मक सोच हो तो किसी भी सपने को हकीकत में बदला जा सकता है।
अवार्ड मिलने के बाद शगूफी ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए जिम्मेदारी है। आगे भी वे कला के जरिए महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और प्रदेश की कला-संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का काम करती रहेंगी।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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