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उझानी बदांयू 21 अगस्त
पशुओं के संरक्षण के लिए सरकार ल प्रशासन दावे तो बहुत कर रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। बीच सड़क पर घूमते बेसहारा गोवंश अक्सर हादसे का कारण बनते हैं और आए दिन वाहन चालक उनसे टकरा कर घायल हो रहे हैं।
सड़कों पर बेसहारा गोवंशों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिनसे राहगीर व वाहन चालक परेशान हो चुके हैं। यह गोवंश हर गली, चौक चौराहों, बस अड्डे, सब्जी मंडी व मेन बाजार के अलावा मंदिरों के बाहर झुंड बनाकर बैठे रहते हैं। हालांकि नगर पालिका ने अभियान भी चलाया था। इसके बाद भी गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं, जो दुर्घटनाओं का कारण भी बन रहे।
विभिन्न एरिया में पशुओं को घूमता हुए देखा जा रहा है। नगर पालिका के साथ ही जिला प्रशासन को ग्रामीण क्षेत्रों की ओर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि लावारिस पशुओं की संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में हैं। पशु खेतों में फसलों को बर्बाद करते हैं और सड़कों पर दुघर्टनाओं का कारण भी बनते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के सर्वेश, लाल चंद, अशोक, प्रवेश कुमार का कहना है कि प्रशासन को शहर के साथ ही गांवों की ओर भी ध्यान देना चाहिए।
दिक्कत केवल शहर में ही नहीं बल्कि गांव में भी होती है।
सबसे ज्यादा लावारिस पशु स्टेशन रोड सरकारी अस्पताल के नजदीक सड़क के किनारे बैठे रहते हैं। कल्याण सिंह चौक की तरफ से बदायूं की तरफ जाने वाले चालकों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं।
इसके साथ ही शहर के हलवाई चौक से साहूकारा, किला खेड़ा मोहल्लों मे लावारिस पशुओं की भरमार है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इन आवारा पशुओं को पकड कर संरक्षित कराना शुरू कर दें जिससे लोगों को आवागमन में दिक्कत ना हो।
राजेश वार्ष्णेय एमके

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