3:46 am Wednesday , 29 July 2026
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जिला पंचायत में प्रायोजित धरना, सच को छिपाना और क्या करना ?

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
जनपद में ग्रामीण अंचल के विकास की जिम्मेदारी का दायित्व निभाने वाली जिला पंचायत में ठेकेदारों द्वारा दिया जाने वाला प्रदर्शन पर्दे के पीछे और टेबिल के नीचे का सच जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है। जनता के बीच चलने वाली चर्चाओं और जिला पंचायत सूत्रों से मिलने वाली जानकारी के अनुसार इस धरने के पीछे का सच यह है कि इसका श्री गणेश ककोडा मेला से पूर्व जिला पंचायत से अंर्तात्मक सम्बंध रखने वाले एक पूर्व जनप्रतिनिधि एवं जिला पंचायत के एक अधिकारी के बीच होने वाले विवाद से हुआ था जिसको लेकर जिला पंचायत कर्मियों ने प्रदर्शन करने के साथ इसकी शिकायत जिलााधिकारी के अलावा प्रदेश स्तर के अधिकारियों से की गई थी जिसमें अधिकारियों द्वारा मेला ककोडा शांतिपूर्वक कराने की बात कह कर ठंडे बस्ते में डाल दिया और मामला शांत भी हो गया था लेकिन बीते माह जिला पंचायत के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का वेतन ना दिए जाने पर यह मामला फिर से उखड गया, जिला पंचायत में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों का वेतन रोका गया तो शोर मच गया जिसको लेकर कर्मचारियों ने जिला पंचायत अध्यक्ष़्ा से मुलाकात करके की जिसके उपरांत बीते दिनों कर्मचारियों का वेतन तो दे दिया गया लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपर मुख्य अधिकारी के वेतन के बारे में चुप्पी साध ली और इसी के चलते अपर मुख्य अधिकारी को वेतन अब तक नहीं मिल सका है। चर्चा है कि सारा मामला अपर मुख्य अधिकारी के स्थानांतरण कराने की योजना से किया गया और इसी के चलते जिला पंचायत अध्यक्ष के चहेते ठेकेदारों से योजना बनाकर प्रदर्शन कराने के साथ मामले की शिकायत किसी अधिकारी से करने के स्थान पर जिला पंचायत अध्यक्ष से की गई ताकि अपर मुख्य अधिकारी का स्थानांतरण कराने की भूमिका बनाई जा सके।
अब अगर इन चर्चाओं में सत्यता है तो लगता है कि जिला पंचायत विकास की जगह राजनीति का ऐसा दंगल बन गया है जिसको भाजपा के बाहरी लोगों ने अपनी जागीर समझ लिया है।

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