बदायूं
महिला अस्पताल में प्रसूता की मौत पर उठे सवाल, 24 घंटे बाद भी जांच नहीं; सीएमओ बोले- जानकारी नहीं
केशव गुप्ता
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के 24 घंटे बाद भी मामले में न तो जांच टीम गठित की गई और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गई है।
उझानी के गद्दी टोला निवासी जहीर अहमद ने रविवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी शमा को सीएचसी उझानी में भर्ती कराया था। प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर उन्हें जिला महिला अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों के अनुसार डॉक्टर की सलाह पर 5,500 रुपये देकर निजी ब्लड बैंक से रक्त लाया गया। आरोप है कि रक्त चढ़ाने के बाद महिला की हालत और बिगड़ गई, जिसके बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। रास्ते में ही प्रसूता की मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास शर्मा ने फोन पर कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। घटना के बाद भी जांच शुरू न होने और निजी ब्लड बैंक की भूमिका की समीक्षा न किए जाने पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
इंसेट: अवैध नर्सिंग होम और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल
जिले में बिना पंजीकरण संचालित नर्सिंग होमों की बढ़ती संख्या और सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध अस्पतालों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, जबकि सरकारी अस्पतालों में भी संसाधनों और निगरानी की कमी के कारण मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा। लोगों ने प्रशासन से स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने, अवैध नर्सिंग होमों पर सख्त कार्रवाई करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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