1:56 pm Sunday , 19 July 2026
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नारीवादी आंदोलन की योद्धा,भारत की पहली शिक्षिका थी सावित्रीबाई फुलेl*

राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फूल की पुण्यतिथि के अवसर पर जनहित सत्याग्रह मोर्चा और उसके सहयोगी संगठनों द्वारा श्री सियाराम अनोखी देवी मेमोरियल स्कूल मुजाहिद पुर बदायूं में राष्ट्र माता सावित्रीबाई फुले का संघर्ष और शिक्षा के क्षेत्र में आज की चुनौतियां विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया गोष्टी के अध्यक्षता मोर्चा के अध्यक्ष प्रेमपाल सिंह ने की गोष्ठी का संचालन चरन सिंह यादव ने किया यहां बुद्ध सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा सावित्रीबाई फुले पर एक पुस्तिका का विमोचन किया गया lकार्यक्रम के शुभारंभ से पहले उपस्थित अतिथियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दीl यहां गोष्ठी को संबोधित करते हुए बौद्ध महा उपासक डॉ.क्रांति कुमार ने कहा कि आज बहुजन मूवमेंट की विचार धारा को मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए हमें गांव, शहर हर जगह सामाजिक शिक्षा को आगे बढ़ाने और राजनीतिक चेतना विकसित करने के लिए शिक्षण प्रशिक्षण की जरूरत है। इसके लिए अध्ययन शिविर आयोजित करने चाहिए।
कवि रविन्द्र सिंह ज्ञानी ने नव
सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी,1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव में एक माली परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम लक्ष्मी और पिता का नाम खंडोजी नेवासे पाटिल था।1841 में लगभग नौ या दस 10 साल की उम्र में सावित्रीबाई का विवाह ज्योतिराव फुले जिनकी उम्र लगभग 13 वर्ष रही होगी से हुआ था।सावित्रीबाई और ज्योतिराव की कोई संतान नहीं थी।उन्होंने एक बच्चे को गोद लिया जिसका नाम यशवंत था।सावित्रीबाई फुले के पास कोई औपचारिक शिक्षा भी नहीं थी।ज्योतिराव ने सावित्रीबाई और अपनी चचेरी बहन सगुनाबाई शिरसागर को घर पर ही पढ़ाया।सावित्रीबाई फुले ने अपनी प्राथमिक शिक्षा ज्योतिराव से प्राप्त की ।अपनी शिक्षा के साथ,सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली महिला प्रिंसिपल और पहले किसान विद्यालय की संस्थापक थी।
रिया भास्कर ने बताया कि सावित्री बाई फुले ने ना केवल महिलाओं की शिक्षा के लिए विपरीत परिर्थितियों में काम किया बल्कि उन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह, जैसी कुरीतियों के खिलाफ और विधवा विवाह के पक्ष में संघर्ष किया। इस काम में उनका साथ उनके पति के दोस्त उस्मान शेख और उनकी बहिन फातिमा शेख ने उनका साथ दिया। फातिमा शेख के योगदान को भी भुलाया नही जा सकता।
एड चिरौंजी लाल जी ने कहा सावित्री बाई फुले के इन प्रयासों से उस समय के रूढ़िवादी , कट्टरपंथी लोग सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले के प्रति बहुत शत्रुतापूर्ण व्यवहार रखते थे। सावित्रीबाई अक्सर स्कूल में एक अतिरिक्त साड़ी ले जाती थीं क्योंकि उन्हें अपने रूढ़िवादी विरोधियों से उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था जो उन पर पत्थर और गोबर फेंकते थे।लेकिन इस सब के बाद भी फुले दंपति अपने मिशन को लेकर अडिग रहे और जीवन पर्यंत संघर्ष करते रहे।
गोष्ठी का संचालन करते हुए महामंत्री चरन सिंह यादव ने कहा वर्ष 1897 में नालासोपारा के क्षेत्र में प्लेग उभरा। सावित्रीबाई और उनके दत्तक पुत्र यशवंत ने इससे प्रभावित व्यक्तियों के इलाज के लिए एक क्लिनिक बनाया।यह सुविधा पुणे के पश्चिमी उपनगरों में संक्रमण मुक्त वातावरण में बनाई गई थी। मुंढवा के बाहर महार बस्ती में प्लेग की चपेट में आने का पता चलने के बाद सावित्रीबाई फुले गायकवाड़ के बेटे के पास गईं और उन्हें अस्पताल ले गईं। सावित्रीबाई फुले इस प्रक्रिया के दौरान प्लेग की चपेट में आ गईं और 10 मार्च,1897 को लगभग रात 9:00 बजे उनका निधन हो गया।
वीरेंद्र जाटव ने कहा सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख की कौमी एकता की मिसाल को सांप्रदायिकता वादी ताकते खत्म कर रही है। दलितों,पिछड़ों,अल्पसंख्याको जोकि बहुसंख्यक लोगों में आते मैं आज भी शिक्षा से वंचित और बेरोजगार हैlपूंजीवादी लोगों के फायदे के लिए वर्तमान सरकारे तरह-तरह के कानून बना रही हैंl शिक्षा का निजीकरण कर शिक्षकों की संविदा पर भर्तियां की जा रही है। देश में शिक्षा का हाल आज भी बहुत गिरा हुआ है।तब बेहद जरूरी हो जाता है कि हमें इस दौर में सावित्रीबाई फूलों के जीवन संघर्ष को आम जनता के बीच में ले जाना चाहिए।एड.आर पी त्यागी ने कहा की आज जरूरत है की सावित्री बाई फुले और बहुजन नायकों के बताए रास्ते पर शिद्दत के साथ चला जाए। तभी हम उनके सपनों का भारत बना सकते हैं।
कवि रविन्द्र सिंह ज्ञानी ने नव वर्ष पर बधाई गीत गाकर सभी को नव वर्ष की बधाई दी। और माता सावित्री बाई फुले और उनके संघर्ष को समर्पित कविता पाठ किया। जिसने दर्शकों को काफी उत्साहित किया।
सभा को संबोधित करते हुए अध्यक्ष प्रेमपाल सिंह ने कहा की हेम सावित्री बाई फुले के जीवन संघर्ष से प्रेरणा लेने की जरूरत है। इसके साथ आज के समाज में मौजूद कुरीतियों, भेदभाव और पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ भी संघर्ष करने की जरूरत है। आज शिक्षा को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। ठेके की नौकरियां दी जा रही हैं। महिलाओं को यौन हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है। दहेज के लिए लड़कियों को जलाया जा रहा है। इन आज की चुनौतियां से निपटे बिना हम फुले दंपति के सपनों का भारत नही बना सकते।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय व्यक्तिगत शिक्षक संघ द्वारा सामाजिक, शैक्षिक , सांस्कृतिक योगदान के साथियों को सम्मानित करते हुए सम्मान पत्र महामंत्री जी द्वारा दिया गया।
गोष्ठी को मान सिंह गौतम, हर्षवर्धन,डा सतीश, सुनील कुमार, राम निवास, एड पवन गौतम, सुरेश चंद्र गौतम, रामचंद्र सिंह, एड सुनील वाल्मीकि, देवेंद्र सिंह यादव,अमर सिंह कौशल, गनपत राम, हरीश कुमार दिनकर,आदि लोगों ने संबोधित किया।

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