गुधनी के प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में साप्ताहिक सत्संग सम्पन्न
ईश्वर का साक्षात्कार अपने भीतर ही संभव – आचार्य संजीव रूप

बिल्सी, बदायूं। तहसील क्षेत्र के ग्राम गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर (यज्ञ तीर्थ) में रविवार को आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग श्रद्धा एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में पतंजलि योग समिति एवं आर्य समाज, बदायूं के पदाधिकारियों सहित क्षेत्र के अनेक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ का संचालन करते हुए कहा कि ईश्वर का वास्तविक मंदिर मनुष्य का हृदय और मन है। उन्होंने कहा कि परमात्मा को बाहरी मंदिरों में नहीं, बल्कि अपने अंतःकरण में खोजने की आवश्यकता है। संसार में हमें उसकी रचना दिखाई देती है, जबकि स्वयं रचयिता प्रत्येक प्राणी के भीतर अंतर्यामी रूप में विद्यमान है। जैसे सीसीटीवी कैमरा प्रत्येक गतिविधि को रिकॉर्ड करता है, उसी प्रकार परमात्मा हमारे प्रत्येक कर्म और मन के भावों का साक्षी है। उन्होंने कहा कि ईश्वर केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि अनुभूति और खोज का विषय है, जिसकी प्राप्ति स्वाध्याय, यज्ञ, योगाभ्यास और सत्कर्मों से होती है।
मुख्य अतिथि योगाचार्य गिरधारी सिंह आर्य ने कहा कि छोटे से ग्राम में रहकर आचार्य संजीव रूप द्वारा सैकड़ों बेटियों को वैदिक पुरोहित एवं संस्कारित नागरिक बनाने का कार्य समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने इसे नारी सम्मान, वैदिक संस्कृति और मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
कार्यक्रम में आचार्या तृप्ति आर्य ने यज्ञ का पुरोहित कार्य संपन्न कराया, जबकि कुमारी ईशा आर्य एवं कुमारी कौशिकी आर्य ने वैदिक मंत्रों का सस्वर वेदपाठ किया।
इस अवसर पर आवेश कुमार सिंह, सुरेंद्र मौर्य, डॉ जुगल किशोर , मदन लाल पाल , बद्री प्रसाद आर्य, राकेश आर्य, श्रीमती लीलावती देवी, श्रीमती सूरजवती देवी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती मुन्नी देवी, श्रीमती गुड्डी देवी, श्रीमती सरोजा देवी तथा आर्य संस्कारशाला के छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
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