2:00 pm Thursday , 30 July 2026
BREAKING NEWS

समुद्र मंथन से सावन तक: एक बूंद गंगाजल को, उमड़ेगा लाखों का सैलाब

समुद्र मंथन से सावन तक: एक बूंद गंगाजल को, उमड़ेगा लाखों का सैलाब।

उझानी-बदांयू 30 जुलाई।

सावन आते ही देशभर में भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा है। कछला गंगा घाट से लेकर हरिद्वार, गौमुख तक लाखों शिवभक्त कंधे पर कांवड़ लेकर निकल पड़े हैं। हाथ में गंगाजल और दिल में ॐ नमः शिवाय का जाप… अब सड़कों पर एक माह यही नजारा देखने को मिलेगा ।

धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय निकले विष को भोलेनाथ ने अपने कंठ में धारण कर लिया था। जलन से बचाने के लिए देवताओं ने उन्हें पवित्र नदियों का जल अर्पित किया। उसी परंपरा को निभाने आज भी भक्त सावन में गंगाजल लाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

शास्त्रों में साफ कहा गया है, छोटी गलती भी यात्रा अधूरी कर देती है।
शुद्धता: मंदिर से पहले हाथ-पैर धोएं। शौच के बाद बिना स्नान कांवड़ न छुएं।
दिशा: जल चढ़ाते समय मुंह उत्तर दिशा की ओर रखें, ये शिव का निवास मानी जाती है ।
कांवड़: इसे कभी जमीन पर न रखें। स्टैंड या ऊंची जगह पर ही टांगें। जमीन छू गई तो जल अशुद्ध
आचार: चमड़े की चीजें, मांस-मदिरा और नशा पूरी तरह वर्जित। कांवड़ उठाने वाले भक्त सात्विक भोजन ही करें।

पहले जलाधारी के दाएं-बाएं कोने में बूंदें, गणेश जी और कार्तिकेय जी के लिए। फिर बीच में और अंत में शिवलिंग पर धीरे-धीरे धारा। अभिषेक के बाद आधी परिक्रमा और ध्यान रहे, जलाधारी को लांघना मना है।

भक्तों का मानना है कि नियम से की गई कांवड़ यात्रा से भोले बाबा सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं और मनोकामना पूरी करते हैं।

पौराणिक मान्यता एवं विद्वान ज्योतिषाचार्यों के कथन पर आधारित।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

विज्ञापन एक्सप्रेस