12:04 pm Thursday , 30 July 2026
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डाक्टर और इंसान में क्यों हो रहा टकराव, कहां है भटकाव ?

आज की बात – सुशील धींगडा के साथ
डाक्टर को धरती का भगवान कहा जाता था और यह सत्य भी लगता है क्योंकि वास्तव में डाक्टर का हमारे जीवन में उस समय प्रवेश होता है जब हमारे अथवा हमारे किसी परिजन पर कोई दुखों का पहाड टूटता है और उस समय हमें भगवान के साथ डाक्टर की याद आती है। अब डाक्टर को भगवान की जगह हम एक व्यवसाई की द्रष्टि से देखें तो आज केवल डाक्टर की डिग्री से कामयाबी का रास्ता नहीं मिलता और उसके लिए चिकित्सक को भवन, आधुनिक मशीनें, मरीजों की सुख सुविधा और अधीनस्थ सहायकों की लम्बी फौज बनानी होती है और जब डाक्टर रूपी व्यवसाई ग्राहक रूपी मरीज से धन मांगता है तो विवाद की शुरूआत होती है जिसमें डाक्टर पर लापरवाही के साथ दवाईयों में कमीशनखोरी के आरोप लगते है और कभी – कभी यह आरोप सच भी लगा करते हैं लेकिन यह तो सोचना होगा कि कौन डाक्टर मरीज की जान बचाने में लापरवाही क्यों करेगा, उसको तो मरीज के जीवित रहने में आर्थिक लाभ के साथ ख्याति लाभ और पुण्य मिलना है जबकि मरीज की मौत डाक्टर को बदनामी का दौर सामना करायेगी। परंतु यह भी तो सच है कि डाक्टर के भगवान जैसे नाम और काम को बदनाम करने वाले भी तो हैं और इसके लिए डाक्टर को अपने आचरण से ज्यादा अधीनस्थों के व्यवहार पर निगाह रखनी होगी।

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