बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं की राजनीति में बढ़ती दूरियां, दलों के भीतर मनभेद बने चर्चा का विषय
बदायूं। जनपद की राजनीति इन दिनों नेताओं के बीच बढ़ते मतभेद और मनभेद को लेकर चर्चा के केंद्र में है। आम लोगों के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों, पूर्व मंत्रियों और विधायकों के बीच आपसी तालमेल पहले जैसा नहीं रह गया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह स्थिति केवल किसी एक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सहित लगभग सभी प्रमुख दलों में कहीं न कहीं देखने को मिल रही है। कई अवसरों पर सार्वजनिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों में भी नेताओं के बीच दूरी महसूस की गई है, जिससे चर्चाओं का बाजार गर्म है।
हालांकि, किसी भी दल के वरिष्ठ नेताओं की ओर से सार्वजनिक रूप से इन मतभेदों की पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि संगठन के भीतर आपसी समन्वय मजबूत नहीं हुआ, तो इसका असर भविष्य के चुनावों और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
वहीं, आम जनता का कहना है कि राजनीतिक दलों को आपसी मतभेद भुलाकर जनहित के मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। लोगों का मानना है कि नेताओं के बीच बेहतर तालमेल और संगठनात्मक एकजुटता ही जनता के विश्वास को मजबूत कर सकती है।
फिलहाल जिले में राजनीतिक दलों के भीतर चल रही इन चर्चाओं पर सभी की नजर बनी हुई है और आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दलों का शीर्ष नेतृत्व इन परिस्थितियों से किस प्रकार निपटता है।
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