बदायूं। जनपद के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल कछला के विकास की तस्वीर लगातार बदल रही है, लेकिन क्षेत्र की सबसे बड़ी मांग आज भी अधूरी है। लोगों का सवाल है कि कछला हाल्ट को दोबारा रेलवे स्टेशन का दर्जा आखिर कब मिलेगा?
कछला में पूर्व जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह के प्रयासों से शुरू हुई श्री गंगा महाआरती आज लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच चुकी है। वहीं विधायक हरीश शाक्य के प्रयासों से गंगा घाटों के पक्कीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। इसके बावजूद रेल सुविधाओं के मामले में कछला अब भी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, पूर्व में मथुरा–आगरा–काठगोदाम रेल मार्ग पर कछला एक प्रमुख रेलवे स्टेशन हुआ करता था। बाद में इसे रेलवे स्टेशन से घटाकर रेलवे हाल्ट का दर्जा दे दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उस समय कुछ प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों की भूमिका के चलते यह बदलाव हुआ, जिसका खामियाजा आज भी क्षेत्र की जनता भुगत रही है।
रेलवे हाल्ट होने के कारण अधिकांश ट्रेनों का ठहराव समय बेहद कम है, जिससे यात्रियों को चढ़ने-उतरने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार जल्दबाजी में हादसे भी हो जाते हैं। वहीं कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनें बिना रुके ही कछला से गुजर जाती हैं, जिसके कारण यात्रियों को दूसरे स्टेशनों पर उतरकर अतिरिक्त साधनों से कछला पहुंचना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कछला हाल्ट को पुनः रेलवे स्टेशन का दर्जा मिल जाए और प्रमुख ट्रेनों का नियमित ठहराव सुनिश्चित हो, तो धार्मिक पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। क्षेत्रवासियों ने जनप्रतिनिधियों और रेलवे प्रशासन से इस दिशा में शीघ्र ठोस पहल करने की मांग की है।
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