4:03 pm Wednesday , 22 July 2026
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फोटो छोडो, छोडिये दावे वही कीजिये जो प्रभाव दिखावे ?

आज की बात – सुशील धींगडा के साथ
2027 में प्रदेश विधानसभा के चुनाव हैं और बदायूं की बात करें तो एक बात पूरी तरह स्पष्ट दिख रही है कि जिले में राजनेतिक दल कोई हो इौर उनका उम्मीदवार कौन किस सीट से मैदान आएगा इसकी जगह इस बात की चर्चा ज्यादा हो रही है कि टिकट किसका कटेगा। आम आदमी को यह बात इसलिये अजीव लग रही है कि चार साल तक चुप क्यों बैठेे। बिसौली का खेल सबके बीच आ चुका है अब वहां सपा से कौन मैदान में आएगा और पिछले चुनाव में भाजपा से मैदान में उतरकर पराजित होने वाले तत्कालीन विधायक कुशाग्र सागर क्या करगें। सपा से मैदान में कौन आएगा। बसपा और कांग्रेस क्या करेगें। बदायूं औा शेखूपुर सीट पर सपा की वर्तमान में चल रही फिल्म का समापन कैसे होगा। दातागंज में सपा, बसपा, कांग्रेस के साथ पूर्व विधायक प्रेम पाल सिंह यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चेतना सिंह यादव के पुत्र कैप्टन अर्जुन सिंह को कौन सहारा देगा। भाजपा के वर्तमान विधायक राजीव कुमार सिंह बब्बू भैया जिले में सबसे अधिक विकाय कार्य कराने के बाद क्षेत्र बदलने की चर्चाओं में कितना दम है और इसका क्या मतलब है कुछ समझ में नहीं आ रहा। भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप क्या चुप हो जाएगें इन सब बातों को लेकर आम आदमी असमंजस में दिख रहा है। बिल्सी में तीन सजातियें राजनेतिक विरोधियों को पराजित करके विधायक बनने वाले भाजपा के हरीश शाक्य को लेकर अगर इतना काम कराने के बाद चर्चाओं का दौर क्यों चल रहा है इसका जवाब कब और कौन देगा इसके बारे में जवाब देने वालों को भी शायद अभी कोई पता नहीं है क्योंकि स्थानीय स्तर पर तमाम दावेदारों के हाथ खाली दिख रहे हैं अथवा उनके पास केवल ऐसे फोटो की एलबम है जो धरातल पर दिख ही नहीं रही है। भाजपा की बात करें तो पिछले चुनाव में भाजपा उम्मीदवार प्रधानमंत्री श्री मोदी, और मुख्यमंत्री की लोकप्रियता के सहारे चुनाव जीते थे और आज भी उसी चौराहे पर खडे हैं जहां से वह श्री मोदी और योगी के जहाज में शामिल हो जाएं। सपा की बात करें तो तमाम दावेदार वोट बैंक के अलावा कोई कोई ऐसी कहानी नहीं है जिसकी राजनीति में कोई रवानी हो। बसपा पूरी तरह खाली हाथ दिख रही है तो 70 साल राज करने वाली उस कांग्रेस की जिले में हालत कैसी है इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस को समर्पित कार्यकर्ताओं में कोई चेहा इस योग्य नहीं दिखा जिसे जिलाध्यक्ष बनाया जाता और शायद इसी के चलते कांग्रेस को गैर जनपद से अध्यक्ष पद हेतु आयात करना पडा।

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