किसानों के मसीहा चौधरी राकेश टिकैत से सहसवान में खंड विकास अधिकारी के विरुद्ध चल रहें अनिश्चितकालीन धरना के लिए लियाआशीर्वाद
बता दें की खंड विकास अधिकारी के विरुद्ध सहसवान तहसील में आज धरना पर बैठे हुए किसानों को 10 दिन व्यतीत हो चुके किंतु इन 10 दिनों में तहसील एवं जिला प्रशासन में आज तक कोई संज्ञान नहीं लिया इससे यह प्रतीत होता है की सहसवान तहसील में राजतंत्र चल रहा है लोकतंत्र समाप्त हो चुका है यदि लोकतंत्र होता तो जनता की आवाज को जरुर सुना जाता अब 19 जून से भारतीय किसान यूनियन गांव गांव जाकर खंड विकास अधिकारी द्वारा कराए गए कार्यों की समीक्षा करेगी जैसे किस-किस गांव में अमृत सरोवर के नाम पर कितना कितना पैसा कौन-कौन से गांव में खर्च किया गया है कितने गांव में कूड़ेदान बनवाए गए कितने कामयाब है कितने गांव में सार्वजनिक शौचालय बनवाई गई हैं और कितने सार्वजनिक शौचालय आज चल रहे हैं सहसवान और दहेगवा ब्लॉक में कितनी गौशाला है और उन गौशाला में कितनी कितनी गाय की उपस्थिति दर्ज है आज सरकारी विभाग में एक पुरानी कहावत चरितार्थ हो रही है सैया भए कोतवाल फिर डर काहे का
किंतु यह भूल गए आज यह लड़ाई न्याय और अन्याय के प्रति है समझ में नहीं आता अधिकारी कर्मचारी को जनता की सेवा के लिए वेतन मिलता है और वह अधिकारी कर्मचारी जनता के लिए 10 मिनट ना दे पाए तो उसे जनता की सेवा के नाम पर वेतन लेने का भी कोई अधिकार नहीं है हम तो सहसवान में खंड विकास अधिकारी के व्यवहार के विरुद्ध धरना पर बैठे थे किंतु 10 दिन व्यतीत होने के बाद भी धरना के संबंध में एसडीम महोदय ने कोई संज्ञान नहीं लिया इसका मतलब साफ है अधिकारी कर्मचारी सब मिले हुए हैं जो व्यवहार खंड विकास अधिकारी के द्वारा किया गया वह ही व्यवहार एसडीएम और तहसीलदार महोदय के द्वारा भी किया गया है अब तहसील प्रशासन के अधिकारियों से तो उम्मीद नहीं अब हम जनता के दरबार में अपनी आवाज उठाएंगे गांव-गांव जाएंगे 19 जून को मैं स्वयं धरना स्थल सहसवान पर जाकर बहा के सभी पदाधिकारी से मीटिंग कर धरना की रणनीति तय करूंगा

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