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उझानी में गूंजा पर्यावरण का जयघोष: ‘एक पेड़ माँ के नाम’ से महका महात्मा गांधी फील्ड।

बदायूं

उझानी में गूंजा पर्यावरण का जयघोष: ‘एक पेड़ माँ के नाम’ से महका महात्मा गांधी फील्ड।

उझानी, 5 जून 2026।

विश्व पर्यावरण दिवस का पर्व आज उझानी में खास अंदाज में मनाया गया। महात्मा गांधी इंटर कॉलेज फील्ड का नजारा बदला-बदला सा था। जहां रोज क्रिकेट के चौके-छक्के गूंजते हैं, आज वहां कुदाल-फावड़े की आवाज और “वृक्ष हैं तो भविष्य है” के नारों ने सबका ध्यान खींचा।

मौका था वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का। सुबह 8 बजे से ही फील्ड में चहल-पहल शुरू हो गई थी। स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी के हाथों में पौधे थे और चेहरे पर धरती को हरा-भरा करने का जज्बा।

*’माँ’ के नाम लगाए गए सैकड़ों पौधे*

कार्यक्रम की सबसे भावुक पहल रही “एक पेड़ माँ के नाम”। लोगों ने अपनी माँ की याद में या उनके साथ मिलकर नीम, पीपल, जामुन और आम के पौधे रोपे। युवा भाजपा नेता कार्तिक अग्रवाल बाबू ने अपनी माँ के हाथों से पहला पौधा लगवाकर अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा, “माँ हमें जन्म देती है, और पेड़ हमें जीवन। इसलिए आज हर पौधा माँ के नाम समर्पित है।”

*नेताओं ने दिलाया हरियाली का संकल्प*

भाजपा के मंडल अध्यक्ष सचिन अग्रवाल ‘बंटी’ ने फावड़ा चलाकर खुद पौधा लगाया और लोगों से अपील की, “राजनीति से हटकर सोचिए। ये पेड़ किसी पार्टी के नहीं, हमारे बच्चों के भविष्य के हैं। उझानी को हरा-भरा बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है।”

सहकारी क्रय-विक्रय समिति के सभापति किशनचंद्र शर्मा ने किसानों को खास संदेश दिया। बोले, “खेत की मेड़ पर पेड़ लगाइए। ये आंधी से फसल बचाएंगे और आपके पोते-पोतियों को छांव देंगे। पर्यावरण बचाएँ, जीवन बचाएँ – ये सिर्फ नारा नहीं, जरूरत है।”

सामाजिक कार्यकर्ता राहुल शंखधार ने बच्चों को प्रकृति से जोड़ा। उन्होंने बताया कि कैसे एक पेड़ दिन में 4 लोगों को ऑक्सीजन देता है और AC से बेहतर ठंडक देता है। बच्चों ने भी “पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ” के नारे लगाकर माहौल को जोशीला बना दिया।

*सिर्फ पौधा नहीं, जिम्मेदारी बांटी गई*

खास बात ये रही कि सिर्फ पौधे लगाकर रस्म अदायगी नहीं हुई। हर पौधे को गोद लिया गया। जिसने पौधा लगाया, उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी उसी की होगी। समिति हर महीने पौधों का हाल लेगी।

कार्यक्रम के अंत में सभी ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि न सिर्फ पेड़ लगाएंगे, बल्कि कटने से भी बचाएंगे। प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करेंगे और उझानी को स्वच्छ, हरित एवं स्वस्थ बनाएंगे।

महात्मा गांधी फील्ड से उठी ये हरियाली की लहर अब पूरे शहर में फैलने को तैयार है। क्योंकि सच ही कहा गया है – *”वृक्ष हैं तो कल है, वृक्ष हैं तो हम हैं।”*


राजेश वार्ष्णेय एमके।

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