कवि रामसहाय शूल की स्मृति में हुई काव्यगोष्ठी, कवियों ने मौन धारण कर दी श्रृद्धांजलि
उसावां। वरिष्ठ कवि रामसहाय शूल की स्मृति में काव्य गोष्ठी का आयोजन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर उसावां में किया गया, जिसमें क्षेत्र के कवियों ने 2 मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता उसहैत के वरिष्ठ कवि नंदकिशोर पाठक ने की।संचालन अमित अंबर ने किया। कार्यक्रम का आरंभ संतोष कुमार सिंह की सरस्वती वंदना से हुआ।
कवि रामनरेश यादव ने पढ़ा, अक्षर अक्षर छिपी हुई है शोभा अनुपम श्याम की
पावन अक्षर जोड़ लगाऊं एवं अर्जी राम की।
नंदकिशोर पाठक ने पढ़ा,घर-घर विवाद हिंदू मुसलमान बनेगा।
तो कैसे स्वर्ण भूमि हिंदुस्तान बनेगा।
जगपाल जग ने पढ़ा,
याद उसकी रह गई उसके निशां अब ना रहे।
हो गई पर्दा नशी जलवा फीशा अब ना रहे।
ए पी यादव ने कहा
साथ चलती ज्यों परछाई मनुज की सदा एक दूजे की वैसे ही पहचान थे।
दो जिस्म थे मगर एक ही जान थे आप कुछ भी सही मेरे भगवान।
अब्दुल बहार आजाद ने पढ़ा,
आप कंचन है कंचन में ढल जाएंगे।
हम तो मति है माटी में मिल जाएंगे।
कवि अमित अंबर में पढ़ा,
चमता चरणों की उनके धूल यारों
कवि थे कविता के रहे अनुकूल यारों
शब्द से अक्षर से इस संसार में
शूल ने बोए हमेशा फूल यारों।
महेश अग्निमुख ने पढ़ा,
बीच में छोड़कर तुम कहां खो गए
तुम मरे ही नहीं तुम अमर हो गए।
मुशीर अहमद मुशीर ने पढ़ा,
नई दुनिया है ठिकाना बना के छोडूंगा
नफरतों के समांडरों को निशाना बना के छोडूंगा
लोग नए हैं अजनबी हैं कोई बात नहीं
मिला मिला के रोज हाथ पुराना बना के छोडूंगा।
सुरेश चंद्र यादव ने पढ़ा,
तुम चलो या ना चलो कारवां रुकता नहीं
यह तो वक्त है साहब बन्दिशों के हद में नहीं।
संतोष कुमार सिंह ने पढ़ा,
जिसका पद बंधन सिंधु करें हिमगिरी जिसका मस्तक ललाम
उसे शस्य श्यामला धरती को भारत माता को सत प्रणाम।
रामानंद मिश्रा ने पढ़ा,
साधारण नहीं थे तुम अब कौन शूल होगा
अपनी नोकों से जो दुश्मन को हराएगा
इसमें इतना साहस हो वही शूल होगा।
अन्त में कवि आदेश कुमार सिंह, महेश कौशल अनीश कल्व ने अपनी कविताओं से समां बांध दिया।
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