बदायूं

ककराला में गूंजा समाज सुधार का संदेश: दहेज उन्मूलन, नशा मुक्ति और हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर


बदायूं जनपद के कस्बा ककराला में अमन कमेटी ककराला के तत्वावधान में समाज सुधार विषय पर एक भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ककराला सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया। पूरे आयोजन में दहेज प्रथा उन्मूलन, नशा मुक्ति, सामाजिक जागरूकता और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुफ्ती मिनहाज कासमी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले उसकी बुराइयों को समाप्त करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा एक गंभीर सामाजिक अभिशाप है, जो गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ डालती है और कई बार बेटियों के जीवन को संकट में डाल देती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना दहेज के विवाह को बढ़ावा दें और समाज को इस कुप्रथा से मुक्त करने का संकल्प लें।
मौलाना डॉ. यासीन अली उस्मानी ने नशा मुक्ति पर जोर देते हुए कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को बर्बाद कर देता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूर रहें और दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जागरूक समाज ही स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकता है।
मौलाना आदम मुस्तफा फिरोज़ाबादी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सभी धर्म इंसाफ, बराबरी और मानवता का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि विरासत का न्यायपूर्ण बंटवारा समाज में शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। अगर हम अपने अधिकारों और कर्तव्यों को सही ढंग से समझें, तो कई सामाजिक विवाद अपने आप समाप्त हो सकते हैं।
रामपुर से आए मौलाना वसीम अहमद फलाही (एडवोकेट) ने कहा कि दहेज प्रथा के खिलाफ कानून पहले से मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद समाज में यह कुरीति जारी है। उन्होंने कहा कि कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है, ताकि लोग खुद इस प्रथा का विरोध करें और इसे पूरी तरह खत्म किया जा सके।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पंडित आचार्य प्रणव मिश्रा (राष्ट्रीय प्रवक्ता) ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि देश की असली ताकत उसकी एकता और विविधता में है। उन्होंने कहा कि आपसी भाईचारा और सद्भाव बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और यही देश को मजबूत बनाता है।
इस अवसर पर ककराला एवं आसपास के गांवों के गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धर्मगुरुओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में अलीगढ़ से आए एएसएम ग्रुप के संस्थापक मौलाना अफरोज ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया, जिससे आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिली।
कार्यक्रम की सफलता में फरहत महमूद (सेक्रेटरी, अमन कमेटी ककराला) की विशेष भूमिका रही, जिन्होंने पूरे आयोजन की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। कार्यक्रम का संचालन कारी मोहम्मद रिजवान खान (इमाम-खतीब, मस्जिद काले खान) ने प्रभावशाली ढंग से किया, जिससे पूरे कार्यक्रम में अनुशासन और उत्साह बना रहा।
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ पत्रकार हामिद अली खान राजपूत ने हिंदू-मुस्लिम एकता के नारे लगवाकर पूरे माहौल को भाईचारे और जोश से भर दिया। इसके पश्चात डॉ. यासीन अली उस्मानी ने दुआ कर कार्यक्रम का समापन कराया।
यह कार्यक्रम न केवल सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि लोगों को एकजुट होकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा भी दे गया।
केशव गुप्ता
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