12:08 pm Tuesday , 21 July 2026
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सडकों की बदहाली और जाम की खुशहाली से क्यों चाहते हो मुक्ति ?

सडकों की बदहाली और जाम की खुशहाली से क्यों चाहते हो मुक्ति ?
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
कौन कहता है कि आजादी के बाद देश का विकास नहीं हुआ बस फर्क इतना सा है कि देखने वालों का नजरिया सही नहीं है। जिले में सडकों की तरफ देख लो गडडा मुक्त सडक हर तरफ दिखेगी, अब गडडों में सडक छिप छिप गई तो इसमें देखने वालों का नजरिया है। जनपद में विकास की गंगा बह रही है तभी तो जिले भर की सडकों पर जाम की फसल लहलहा रही है, अगर विकास ना होता और बेरोजगारी होती तो वाहनों की इतनी संख्या क्या दिखावे को होती। जिले में नगर पालिका और नगर पालिकाएं कितनी निष्ठा से काम कर रही ह ैवह दोपहर में कूडा लेकर जाने वाले पालिका और परियाद के वाहनों से लगाया जा सकता है, अब इतना विकास होने के बाद पहले सफाई होगी तो कूडा सुबह – सुबह कैसे उठेगा और जब सुबह कूडा नहीं उठ पाएगा तो दोपहर में उठने से कौन सा पहाड टूट जाएगा।
प्राइवेट बस अडडे पर गंदगी का समाज््रय तो सबको दिखता है पर बस अडडे पर नागरिकों को जाने से बचने के लिए बस अडडे के समीप आधा दर्जन यात्री शेड हमारे पालनहारों ने बनवा तो दिए फिर बस अडडे की गंदगी की तरफ देखते ही क्यों हों। बिसौली, वजीरगंज, उझानी, कछला और बदायूं में जाम को लेकर तमाम इल्जाम लगाना कहां तक उचित है क्योंकि टिर्री और टैम्पों की बडती संख्या इस जाम का कारण है पर यह क्यों भूलते हो कि यह टैम्पों और टिर्री से ना जाने कितने घरों की रोजी – रोटी चल रही है अगर टैम्पों और टिर्री राहगीरों और अन्य वाहन चालको को बना देते हैं सिर्री तो इसमें परिवहन विभाग और पुलिस क्या कर सकती हैं।

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