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2012 से लिपिक के ले रहे वेतन के रिकवरी के ईओ ने दिऐ आदेश।
उझानी-बदायूं एक्सप्रेस 19 दिसंबर।
नगर पालिका परिषद के मृतक आश्रित कोटे से चौकीदार बने नफीस अहमद अंसारी ने इंटरमीडिएट की फर्जी अंकतालिका लगाकर जलकलप्रभारी बनकर 12 साल लिपिक का वेतन लेते रहे, अब रिकवरी के साथ ही ईओ ने पालिकाध्यक्ष के आदेश पर उन्हें चौकीदार के मूल पद पर वापस कर दिया है।
ज्ञात रहे नगर निवासी सिपट्टर सिंह सोलंकी ने नफीस अहमद के फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर चौकीदार के मूल पद से लिपिक बनने की शिकायत की । व नफीस अहमद के शैक्षिक प्रमाण पत्र भी सोंपे।
शिकायत के आधार पर पालिकाध्यक्ष ने नफीस अहमद को जलकल प्रभारी के पद से निलंबित कर दिया व जांच के आदेश दिए।
ईओ द्वारा एटा जनपद के गांव भरतोली के श्री दयानंद इंटर कॉलेज की इंटरमीडिएट के रोल नंबर ,अंकपत्र की जिला विद्यालय निरीक्षक से जानकारी मांगी। एटा के डीआईओएस ने अंकपत्र व रोल नंबर को फर्जी पाया।
जांच में अंकपत्र फर्जी पाऐ जाने पर नगर पालिका के ईओ ने लिपिक नफीस अहमद अंसारी को उनके मूल पद चौकीदार पर वापस कर उनसे 2012 से लिपिक के मिलने वाले वेतन की रिकवरी के आदेश दिए हैं।
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नगर पालिका में 90% कर्मचारी हैं मृतक आश्रित ?।
कई बर्षो से शासन स्तर से नगर पालिका में कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई है। उझानी की नगर पालिका परिषद में काफी समय से मृतक आश्रित कर्मचारियों का कब्जा है। काम के साथ प्रमोशन मिलना भी लाजिमी है। ऐसे में उनकी पढ़ाई कम भी हो तजुर्बे के साथ ही प्रमोशन मिल जाता है। भले ही वह उस पद के लायक योग्यता रखते हो या नहीं। नफीस अहमद ने भी लिपिक का जल्द पद पाने के लालच में ऐसा किया होगा,इस बावत जानकारी को नफीस अहमद से मोबाइल द्वारा संपर्क करने का प्रयास किया मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
राजेश वार्ष्णेय एमके
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