कवि टिल्लन वर्मा के जन्मदिन पर काव्य गोष्ठी – हर काग़ज़ पर चाहिए पैशकार को घूस..मुंशिफ बैठा देखता,पैशकार है खडूस।
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उझानी- बदांयू एक्सप्रेस 13 दिसंबर।
बीती शाम स्वर्गीय टिल्लन वर्मा वरिष्ठ साहित्यकार का जन्मदिन जी एस हास्पीटल के तत्वावधान में साहित्यकार एवं परिवार के लोगों ने बड़ी धूमधाम से मनाया जिसमें एक काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया।
काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता ओम प्रकाश सर्राफ उर्फ पप्पी द्वारा की गई और संचालन शायर विवेक चतुर्वेदी द्वारा किया गया, मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती आरती वर्मा पत्नी स्व टिल्लन वर्मा उपस्थिति रही।
गोष्ठी का प्रारंभ सरस्वती वंदना के द्वारा किया गया उसके बाद निम्न कवियों व शायरों ने अपना काव्य पाठ किया।
बोले विवेक चतुर्वेदी-
दशरथ की इच्छा राम को वनवास देती है।
संभालने का अवसर भी किसी की प्यास देती है।।
दोबारा से खड़े होने का मन यूं ही नहीं बनता
यह टूटी हुई हिम्मत भी हमें आस देती है।
हास्य कवि शैलेंद्र घायल बोले-
बेटी को मत मारिए यह आंगन का दीप।
बेटी से संसार है ज्यों सागर में शीप।
शायर वारिस बदायूनी ने सुनाया
सॉन्ग में बस्ती डूब जाती है ।
जब भी टिल्लन की याद आती है।।
डॉ गीतम सिंह ने कुछ यूं फरमाया-
आशिकी को छोड़कर हम सादगी करने लगे।
आम चर्चा आदमी भी अब सभी करने लगे।।
अनिल वार्ष्णेय बोले-
हर पेज पर चाहिए पेश कार को घूस।
मुंशिफ बैठा देखता पेशकार है खड़ूस।।


गोष्ठी में अनिल कुमार गुप्ता उर्फ टिन्नु ,डॉ. विकास प्रजापति आकाश, हंसराज, रामपाल एडवोकेट, डॉ. प्रभाकर मिश्रा , संजीव सक्सेना अमर, श्रीमती रीता शर्मा श्रीमती अरूणा कुमारी,वीर पाल आदि उपस्थित रहे। कवि टिल्लन वर्मा के जन्मदिन पर सभी ने केक काटकर उनको भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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