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उझानी बदांयू एक्सप्रेस 6 दिसंबर।
एसआईआर का काम अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच रहा है, वैसे-वैसे नए-नए और रोचक किस्से भी देखने-सुनने को मिल रहे हैं। आपसी मनमुटाव, जमीनी बंटवारे के झगड़ों और प्रेम विवाह आदि कारणों से कई-कई वर्षों से जिन लोगों के बीच बोलचाल नहीं थी, वे एसआईआर के चलते एक-दूसरे से संपर्क करते घूम रहे हैं।
कासगंज से अपना फार्म लेने आई मधु ने बताया कि पांच साल पहले माता-पिता की मृत्यु हो गई थी। भाभी से विवाद के बाद उसने मायके आना छोड़ दिया था लेकिन एसआईआर के चलते उसे आना पड़ गया और परिजनों से बातचीत की।
कई गांव की बेटियों ने प्रेम विवाह कर लिया। इससे उनके परिजनों से दूरियां हो गईं और आना-जाना भी बंद हो गया। अब एसआईआर में फार्म भरने के लिए वर्ष 2003 का डाटा लेने के लिए वह परेशान हैं। कई लोग तो फोन और व्हाट्सअप के माध्यम से डाटा भेज दे रहे हैं तो वहीं कई घरों में वे बेटियां खुद ही अपना डाटा लेने आ रही हैं, जिनके रिश्ते प्रेम-विवाह से शादी करने के बाद से अपने मायके पक्ष से खराब हो गए थे।
इसी तरह नरऊ क्षेत्र में एसआईआर कार्य में लगे कर्मचारी कपिल कुमार बताते हैं कि उनके क्षेत्र के तीन भाईयों के परिवार ऐसे हैं जो कई वर्षों से बाहर रह रहे हैं और उनके एसआईआर फार्म यहां रखे हैं। गांव में उनके चौथे भाई का परिवार रहता है। जब चौथे भाई से फार्म लेने और फोटो, डाटा देकर वापस जमा करने के लिए कहा गया तो उन्होंने भाईयों से पिछले पांच सालों से कोई मतलब नहीं होने की बात कहकर फार्म लेने से ही इन्कार कर दिया।
किसी तरह फोन नंबर तलाश कर जब बीएलओ ने तीनों भाईयों से संपर्क किया तो उन्हें अपने चौथे भाई की याद आई। वृहस्पतिवार को चौथा भाई तीनों अन्य भाईयों के परिवार की फोटो और फार्म भरने के लिए जरूरी जानकारी लेकर अचानक बीएलओ के पास पहुंचा तो सभी लोग चौंक गए। उन्होंने बताया कि एसआईआर के बहाने ही सही पांच साल से बंद बोलचाल दोबारा शुरू हो गयी है।
हे ना एसआईआर का कमाल कि वोट के बहाने कई परिवारों के टूटे रिश्ते बोलचाल फिर शुरू हो गई।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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