वजीरगंज बदायूं
विकासखंड वजीरगंज की राजनीति की बात की जाए तो इस समय केवल भारतीय जनता पार्टी के नेता कार्यकर्ता और पदाधिकारी ही पूरे क्षेत्र में दिखाई दे रहे हैं चाहे कार्यकर्ताओं में अंदर खान कितना भी मतभेद हो लेकिन पार्टी के कार्यक्रम में और चुनाव के वक्त एक जुटता जरूर दिखाई देती है लेकिन इसके अलावा भी अंदर खाने एक दूसरे को अपने राजनीतिक आकाओ के माध्यम से क्षेत्र में अपना कद बड़ा करने की जुगाड़ में हमेशा से लग रहे हैं और इसी शह और मात के खेलने वजीरगंज के नगर पंचायत चुनाव में कमल के फूल को नहीं खिलने दिया और पार्टियों से आए हुए लोग पर चढ़कर राजनीतिक कार्यक्रमों हिस्सेदारी निभाते हैं वहीं पार्टी का वर्षों पुराना कार्यकर्ता आज अपेक्षित होकर किनारे खड़े होकर ताली बजाने के लिए मजबूर है लेकिन सत्ता की मलाई आज वह लोग खाते हुए दिखाई दे रहे हैं सत्ता परिवर्तन के बाद दूसरी पार्टियों से निकालकर लोग आज अपने आप को पार्टी का वफादार और टिकाऊ कार्यकर्ता बता रहे हैं लेकिन आज सत्ता की बहती इस गंगा में गोते लगा रहे हैं और अपना सियासी कद बढ़ाने की जुगाड़ में लगे हुए हैं यहां बात केवल भाजपा की ही नहीं है समाजवादी पार्टी बहुजन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस तो नगर के साथ-साथ क्षेत्र में जैसे खो ही गई है जिले में समाजवादी के सांसद होने के बावजूद भी नगर में आज तक उनका एक भी प्रोग्राम नहीं हो पाया है इसका सीधा सा उदाहरण नगर में समाजवादी पार्टी का कोई भी जिम्मेदार पदाधिकारी आगे आने के लिए तैयार नहीं दिखाई दे रहा कस्बे के समाजवादी लोग भी अपना काम निकालने के लिए भाजपा के नेताओं की परिक्रमा करते हुए दिखाई देते हैं वही बहुजन समाज पार्टी का कैटर वोट बैंक तो कस्बे में अच्छी खासी संख्या में है लेकिन इस पार्टी के स्थानीय नेता भी इन दिनो चुपचाप बैठे हुए है कांग्रेस पार्टी का कस्बे में कोई भी खास प्रभाव नहीं है लेकिन है नगर सहित आसपास क्षेत्र में भाजपा सपा और बसपा का अपना अच्छा खासा जनाधार है लेकिन आज के वक्त में उनके स्थानीय नेता भाजपा के नेताओं के साथ जुगलबंदी करते हुए देखे जा रहे हैं चाहे तो भाजपा के स्थानीय नेताओं की यह मजबूरी हो या अपना राजनीतिक सफर ऊंचाइयों पर ले जाना चाह रहे हो या फिर आर्थिक रूप से मजबूत होना चाह रहे हो कारण चाहे कोई भी हो और इसका खामियाजा भाजपा को नगर पंचायत चुनाव में उठना भी पड़ा है कस्बे के नगर पंचायत चुनाव में जहाँ एक और भाजपा की तरफ से दीपेश नेता जी को वजीरगंज में कमल खिलाने की जिम्मेदारी मिली थी भाई भाजपा के स्थानीय और पूर्व प्रत्याशी राहुल नेता जी ने भी अपना दावा पंचायत चुनाव के लिए ठोका और दोनों ने बड़े ही दमदारी से पंचायत चुनाव लडा एक और जहां भाजपा के अधिकांश पार्टी पदाधिकारी चुपके-चुपके भाजपा विरोधी कार्य कर रहे थे वहीं दूसरी तरफ दोनों ही प्रत्याशी पार्टी बोट बैंक के साथ-साथ समाजवादी और बसपा के लोगों की बड़ी परिक्रमा कर रहे थे और उन्हें यह विश्वास भी था कि हम इसमें कामयाब भी हो सकते हैं क्योंकि उन लोगों का इन दोनों नेताओं ने खूब साथ दिया था और उसके बावजूद भी इन दोनों पार्टी के लोगों का वोट अपनी अपनी पार्टी के प्रत्याशी के पाले में चला गया जिसकी नगर में व्यापक चर्चाएं भी हुई और वही कार्य आज भी बा दस्तूर जारी है स्थानीय स्तर पर हर पार्टी में आपसी पदाधिकारी में मतभेद है लेकिन उसके बावजूद भी दूसरे दल के नेता भी बहती हुई भाजपा की गंगा में डुबकी लगाने के साथ-साथ अपने काम निकालने में मस्त है

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