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राजेश वार्ष्णेय एमके।
उझानी बदांयू 4 नवंबर।
बदायूं जिले का मिनी कुंभ मेला ककोडा बैलगाड़ियों से जाते श्रद्धालु परिवारों को मेले में जाते देख लोग चौक गए। श्रृद्धालुओं की भीड़ आधुनिकता के इस दौर में भी बड़े हर्ष और उल्लास के साथ गंगा स्नान कर पुण्य कमाने जा रहे हैं। वह मुख्य स्नान पर गंगा में डुबकी लगाकर घर को वापसी करेंगे।
आधुनिकता का सबसे अधिक असर कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले पर पड़ा है। दशकों पहले लोग मेले में बैलगाड़ी, घोड़े तांगे और बुग्गी से जाते थे। वहीं अब उनका स्थान ट्रैक्टर ट्रॉली बसों और लक्जरी कारों ने ले लिया है। गंगा मेले में बैलगाड़ी, बुग्गी, घोड़े तांगे आदि नजर नहीं आते। मंगलवार दोपहर शेखूपुर कादर चौक मार्ग पर श्रद्धालुओं की बैलगाड़ी देख हर कोई चौक गया। आस-पास के ग्रामीण बैलगाड़ियों में जरूरत का सामान, परिवार के सदस्यों को बैठाकर मेला स्थल को बढ़े जा रहे थे , बैलगाड़ी में पशुओं के लिए चारा भी रखा हुआ था। वही मेले में रूकने को खाने-पीने का सामान,रजाई गद्दे तक भरे हुए नजर आऐ।
पूछने पर बताया कि वह कादरचौक क्षेत्र के गांव भूडा भदरोल के रहने वाले हैं। वह गांव से हर साल ककोडा में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले गंगा मेले में बैलगाड़ी से ही जाते हैं चार दिन रूकते हैं, गंगा स्नान कर वापस आते हैं।
उनका गांव ककोडा मेला स्थल से करीब 10 किमी दूर है, लेकिन गंगा मैया की श्रद्धा और आस्था उनको मेले में हर बार खींच लाती है।
वह मुख्य स्नान तक गंगा मेले में रहकर नित्य सुबह स्नान कर पुण्य कमाएंगे। पर्वी पर स्नान के बाद उनकी वापसी होगी।
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