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हाइवे से लेकर कछला गंगा घाट पर फिलहाल सीमित दिख रहे शिवभक्त।
उझानी-बदांयू 2 अगस्त।
सावन माह में शुरू हुई कांवड़ यात्रा पर इस बार पंचक का असर साफ देखने को मिल रहा है। 31 जुलाई से शुरू हुआ पंचक 4 अगस्त तक चलेगा, जिसके कारण कांवड़ियों की संख्या में कमी आई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन पांच दिनों में कांवड़ उठाना अशुभ माना जाता है, इसलिए कई श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा टाल दी है।
ज्योतिषाचार्य राजेश शर्मा के अनुसार, पंचक चंद्रमा की स्थिति पर आधारित एक खगोलीय घटना है जो पांच नक्षत्रों – धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती के संयोग से बनती है। हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों में पंचक को अशुभ बताया गया है।
चूंकि कांवड़ यात्रा एक पवित्र अनुष्ठान है और इसमें लंबी दूरी तय करनी होती है, इसलिए पंचक काल में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। इसी कारण 31 जुलाई से 4 अगस्त तक कांवड़ उठाने को वर्जित माना जा रहा है।
30 जुलाई से शुरू हुए सावन माह में कछला में कांवड़ियों की भीड़ अभी सीमित ही दिख रही है। स्थानीय व्यापारियों और प्रशासन का अनुमान है कि 4 अगस्त को पंचक समाप्त होते ही श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाएगी।
कांवड़ यात्रा में शिवभक्त गंगा से पवित्र जल लाकर अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा आमतौर पर श्रावण मास में की जाती है।
हालांकि, 30 जुलाई से ही यात्रा शुरू कर चुके कुछ कांवड़ियों का मानना है कि यदि यात्रा पंचक से पहले शुरू कर दी गई हो तो उस पर पंचक का असर नहीं पड़ता। ऐसे श्रद्धालु अपनी यात्रा निरंतर जारी रखे हुए हैं।
पंचक समाप्त होने के बाद कांवड़ यात्रा में तेजी आने की पूरी उम्मीद है। प्रशासन ने भी 4 अगस्त के बाद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं।
राजेश वार्ष्णेय एमके
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