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किसानों के लिए एटीएस साबित होगी हरी मटर की फसल

बदांयू 30 अक्टूबर।

रबी सीजन में किसानों को हरी मटर मुनाफे वाली फसल है। इसकी बुवाई का सही समय अक्टूबर अंत से नवंबर मध्य है, जब तापमान 15-25 C हो।
अच्छी उपज के लिए, खेत की तैयारी में गोबर की खाद मिलाएँ और pH 6-7 रखें। बुवाई के लिए 60-80 किलो बीज प्रति हेक्टेयर और 30 cm की कतार दूरी रखें। बेहतर देखभाल से 80-100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज मिल सकती है।

अगर आप इस रबी सीजन में कम खर्च और ज्यादा मुनाफे वाली फसल की तलाश में हैं, तो ‘हरी मटर’ आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। मटर की खेती न सिर्फ स्वाद और पोषण से भरपूर है, बल्कि इसकी बाजार में सालभर अच्छी मांग रहती है। अक्टूबर के आख़िर से लेकर नवंबर के मध्य तक इसकी बुवाई का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान तापमान 15 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जो बीज अंकुरण और पौधों की बढ़त के लिए आदर्श होता है। इस मौसम में की गई खेती से किसानों को फसल फरवरी तक मिल जाती है, जो बाजार में ऊंचे दाम पर बिकती है।

खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी और खरपतवार मुक्त हो जाए। आख़िरी जुताई के समय सड़ी हुई गोबर की खाद (20-25 टन प्रति हेक्टेयर) खेत में मिला दें। इसके बाद एक या दो बार हल्की सिंचाई करें ताकि भूमि में पर्याप्त नमी बनी रहे। ध्यान रखें कि मिट्टी का पीएच स्तर 6 से 7 के बीच हो, जिससे पौधों को पोषक तत्व आसानी से मिल सकें। रेतीली दोमट मिट्टी मटर के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है क्योंकि इसमें जल निकासी अच्छी होती है।

मटर की खेती के लिए उच्च उत्पादक किस्मों में पूसा प्रतीक, अर्का किरण, आजाद पी-1, अरुणा, और काजीपुर मटर जैसी किस्में लोकप्रिय हैं। बुवाई से पहले बीज को राइजोबियम कल्चर या ट्राइकोडर्मा से उपचारित करना चाहिए ताकि जड़ गांठें अच्छी बनें और पौधों को रोगों से बचाव मिले। बीज की बुवाई कतारों में 30 सेंटीमीटर की दूरी पर करें और पौधों के बीच 10 सेंटीमीटर का अंतर रखें। प्रति हेक्टेयर लगभग 60–80 किलोग्राम बीज पर्याप्त होते हैं।

फसल की बढत पर समय-समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और संतुलित उर्वरक प्रबंधन जरूरी है। पहली सिंचाई बुवाई के 15–20 दिन बाद करें और इसके बाद हर 10–12 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई देते रहें। रासायनिक खाद में 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर देना उचित रहता है। फूल आने और फल बनने के समय नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है, ताकि फली का आकार और स्वाद दोनों बेहतर हों। करीब 70–80 दिनों में मटर की फसल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है और अगर अच्छी देखभाल की जाए तो प्रति हेक्टेयर 80–100 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है। इस तरह मटर की खेती किसानों के लिए सर्दियों की ‘हरी कमाई’ साबित हो सकती है।

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