पं. श्रीराम शर्मा आचार्य भारत के एक युगदृष्टा मनीषी थे। जिन्होंने अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना की। उन्होनें अपना जीवन समाज की भलाई तथा सांस्कृतिक व चारित्रिक उत्थान के लिये समर्पित कर दिया। उन्होंने आधुनिक व प्राचीन विज्ञान व धर्म का समन्वय करके आध्यात्मिक नवचेतना को जगाने का कार्य किया। उनका व्यक्तित्व एक साधु-पुरुष, आध्यात्म-विज्ञानी, योगी, दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, लेखक, सुधारक, मनीषी व दृष्टा का समन्वित रूप था। 1927 से 1933 तक का उनका समय एक सक्रिय स्वयंसेवक- स्वतंत्रता सेनानी के रूप में बीता। पं. महामना मदनमोहन मालवीय ने उन्हें काशी में गायत्री मंत्र की दीक्षा दी थी।वे 4 वेद,108 उपनिषद, 6 दर्शन, 20 स्मृतियां और 18 पुराणों के भाष्यकार भी हैं ।
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