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उझानी बदांयू 28 अगस्त।
ई स्टांप व्यवस्था लागू होने के बाद भी कालाबाजारी नहीं थम रही है। स्टांप के लिए लोगों को दोगुनी से तिगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है। 10 रुपये का स्टांप पेपर 20 से लेकर 30 रूपये में बिक रहा है।
इसके अलावा 50 और 100 रुपये वाले स्टांप की कीमत भी 20 से 30 रुपये अधिक वसूली जा रही है।
ज्ञात रहे कि शपथ पत्र बनवाना हो या अन्य कोई लिखा-पढ़ी करानी हो, स्टांप पेपर की जरूरत पड़ती है। इस समय छात्रवृत्ति फार्म के साथ ही कई विभागों में भर्तियां चल रही हैं। ऐसे में चाहे आय प्रमाणपत्र बनवाना हो या ईडब्ल्यूएस, 10 रुपये के स्टांप पेपर की जरूरत पड़ रही है। इसके अलावा शासन की ओर से संचालित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को शपथ पत्र देना पड़ता है। ई स्टांप वेंडर लोगों से स्टांप पर छपी कीमत से ज्यादा वसूली कर रहे हैं।
बुधवार को मिले तीन लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने ईडब्ल्यूएस बनवाने के लिए एक स्टांप वेंडर से 10 रुपये का स्टांप लिया तो वेंडर ने 20 रुपये मांगे। पूछने पर वेंडर ने बताया कि 10 रुपये का स्टांप 20 रुपये में और 50 से 100 रुपये के स्टांप पर 20 से 30 रुपये ज्यादा लिए जाते हैं। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उन्हें 50 और 100 के स्टांप पर 50 रुपये अधिक देने पड़े। मजबूरन लोग अधिक दाम चुकाकर स्टांप खरीद रहे हैं।
वहीं किसी सरकारी कार्य के लिए शपथपत्र बनवाना ओर भी मंहगा है 10 रूपये के ई स्टांप पेपर पर उसके लिए वेंडरों द्वारा लोगों से 100 से 150 रूपये तक बसूले जा रहे हैं।
लोगों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि अवैध बसूली करने वाले स्टांप वेंडरों की जांच कराई जाऐ दोषी मिलने पर कार्रवाई की जाऐ। जिससे आम जनता को इसका लाभ मिल सके।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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