हाइवे के निर्माण में लगे डंपरों से सडक बनी नरक, पैदल निकलना भी दूभर।
अपना काम बनता भाड में जाए जनता, वाली कहावत देखना है तो नरऊ आईए।
उझानी बदांयू 5 जुलाई।
कोतवाली क्षेत्र के गांव नरऊ के निवासियों की भी अजब-गजब कहानी है बर्षो से प्रदूषित पानी पी रहे ग्रामीणों का अब सडक पर पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है। हाइवे के निर्माण में मिट्टी डाल रहे डंपरों से गांव की मुख्य सडक का नामो-निशान मिट गया है। बचीं है सिर्फ दल-दल उसी से रोज निकलने में ई-रिक्शा,बाइक व साइकिल सवार गिरकर चुटैल हो रहें हैं।
बीती रात बाइक से गांव जा रहे छोटेलाल की बाइक फिसलने से दो लोग घायल हो गये। वहीं रोज स्कूल आने वाले छात्र छात्राओं को भी सडक पर बने गड्ढों व मिट्टी से बनी दलदल से पैदल निकलने में भी परेशानियां का सामना करना पडता है।
नरऊ जाने वाली सडक का आलम यह है कि कादरचौक रोड से मुड़ते ही गड्ढे स्वागत को तैयार नजर आते हैं थोडा आगे बढ़ते ही राधाकृष्ण मंदिर तक डंपरों से गिरी मिट्टी से बने दल-दल में पैदल निकलना भी टेडी खीर नजर आता है।
पहले से जीर्ण-शीर्ण सडक पर मारी डंपरों के चलने से गहरे-गहरे गड्ढे हो गये है उनमें हाइवे निर्माण करने वाली कंपनी के कर्मचारियों ने मिट्टी डालकर ,अपना काम बनता भाड में जाए जनता, वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया है।
हल्की सी बारिश से सडक पर मिटटी का दलदल बन जाता है जहां गिरकर लोग चुटैल हो रहें हैं।
राजेश वार्ष्णेय एमके।



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