प्रदीप प्रजापति
: जब रिश्तों की मर्यादा टूटती है, समाज की आत्मा कांप उठती है
हाल ही में सामने आया एक मामला, जिसमें एक विवाहित महिला ने अपने ही भतीजे के साथ विवाह कर लिया, हमारे समाज की नैतिकता और पारिवारिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यह न केवल वैयक्तिक स्तर पर एक चरित्रगत गिरावट है, बल्कि सामूहिक चेतना और सामाजिक व्यवस्था की भी विफलता का प्रतीक है।
आयुषी नाम की महिला, जिसने पति और बच्चों का त्याग कर अपने भतीजे सचिन दुबे के साथ संबंध बनाए और विवाह कर लिया — यह कोई आम प्रेम-प्रसंग नहीं है, बल्कि पारिवारिक रिश्तों की उस रेखा को पार करने का दुस्साहस है, जिसे भारतीय समाज ‘अविवेक’ नहीं बल्कि ‘पतन’ कहता है।
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