6:01 pm Thursday , 30 July 2026
BREAKING NEWS

बदलते दौर में बदल गई परंपरा- डीजे, ड्रिंक, डांस और डिशूम के आगे फींकी पड़ी शहनाईयों की गूंज

उझानी बदांयू 4 जून।

आजकल की शादियों में शहनाइयों की गूंज व लोकगीत की धुन फीकी लग रही है। यह और बात है कि पहले मांगलिक कार्यों में ढोलक,शहनाईयों की गूंज की खासी अहमियत होती थी, लेकिन बदलते दौर में अब ये परंपराएं पीछे छूटती जा रहीं हैं।

आज के समय में ऐसे आयोजन का तब तक कोई औचित्य नहीं जब तक उसमें फोर-डी की व्यवस्था न हो। आश्चर्य करने की जरुरत नहीं है। तिलकोत्सव हो या विवाहोत्सव या कोई अन्य मांगलिक कार्यक्रम ही क्यों न हो, हर जगह फोर-डी का धमाल देखने को मिल रहा है। खास कर युवा वर्ग के लिए फोर-डी आवश्यक ही नहीं आवश्यकता बन चुकीं हैं। इसके प्रति युवाओं का बढता रुझान चिंता का सबब बनता जा रहा है।

शादी विवाह में युवाओं में खास जगह बना चुके डीजे की मांग हर जगह हो रही है। दोस्तों के शौक को पूरा करना दूल्हे की प्राथमिकता सूची में शामिल है। धनाभाव का हवाला देकर भले ही अन्य आवश्यक चीजों की व्यवस्था न हो पाए, लेकिन डीजे के लिए हजारों रुपये खर्च करने में कोई हिचक नहीं होती। बढ़िया से बढिया डीजे और लेडीज डांसर के लिए रुपये पानी की तरह बहा दिया जा रहा है।

दूल्हे के दोस्तों को डीजे की धुन पर डांस करने से पहले शरीर में फुर्ती लाने के लिए अगले चरण में ड्रिंक की व्यवस्था की जाती है। इसमें वाइन या बीयर कुछ भी चलेगा। ड्रिंक का शुरुर चढते ही पांव स्वचालित यंत्र की तरह थिरकने लगते हैं। क्लासिकल संगीत से शुरु हुआ कार्यक्रम देखते ही देखते अश्लील गीतों तक पहुंच जाता है।

थ्री डी के शुरुर का लुफ्त उठा रहे युवाओं के रंग में भंग तब पडता है जब गीत बजाने को लेकर तू तू मै मै होने लगती है। झिक झिक से प्रारंभ हुई बात बढते बढते ढिशूम ढिशूम तक आ जाती है। इस तरह चौथा डी अपना रंग दिखाना शुरु कर देता है।

कहीं कहीं हालात इतन बदतर हो जाते है कि फोर डी के चक्कर में पड कर परिवार के सदस्यों को भी अस्पताल व थाने का चक्कर लगाना पडता है। समाज में हावी होते फोर -डी के प्रभाव से बुद्धिजीवी वर्ग काफी चिंतित है लेकिन पश्चिमी सभ्यता के नशे में बेअंदाज युवा पीढी के आगे मुंह बंद करना उनकी लाचारी बन गई है।

इस पर रोक लगायें अभिभावक।

विवाहोत्सव जैसे मांगलिक कार्यक्रमों में तेजी से पांव पसार रहे फोर-डी पर अपना विचार व्यक्त करते हुए अभिभावक अनूप जेन ने कहा कि दो लोगों के बीच नफरत फैलाने में डीजे,डांस और ड्रिंक की महत्वपूर्ण भूमिका है। कहा कि युवाओं में डीजे, ड्रिंक और डांस का बढता शौक मारपीट भी करा रहा है।

शिक्षक डाॅ संतोष कुमार गुप्ता ने कहा कि अपने बच्चों को सही रास्ता दिखाने का का काम माता पिता का है। सही दिशानिर्देशन के अभाव में बच्चे गलत मार्ग चयन कर रहें हैं।

डाॅ संजीव गुप्ता ने कहा कि मांगलिक उत्सवों में इस तरह की नवीन परम्पराओं की नींव पडना ठीक नहीं है।
डीजे तक तो ठीक है जिस तरह से ड्रिंक को बढावा दिया जा रहा है वह ठीक नहीं है। इस पर रोक लगाने के लिए अभिभावकों को आगे आना होगा।——————– राजेश वार्ष्णेय एमके।

विज्ञापन एक्सप्रेस