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खरमास शुरू, एक माह तक शुभ कार्य वर्जित

।******** बदांयू 15 मार्च।

खरमास शुरू हो चुके हैं, अब एक माह तक शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। खरमास एक ऐसी अवधि होती है, जब शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास एक ऐसी अवधि होती है, जब शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। यह तब होता है जब सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करता है। हर साल यह समय दो बार आता है, पहली बार दिसंबर-जनवरी में और दूसरी बार मार्च-अप्रैल में। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों को करने से बचने की परंपरा रही है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस अवधि में ग्रहों की स्थिति शुभ नहीं होती और कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं।
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खरमास का धार्मिक महत्व
हालांकि खरमास को धार्मिक दृष्टि से बहुत शुभ माना जाता है। इस समय पूजा-पाठ, मंत्र जाप, गंगा स्नान, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। खासतौर पर इस अवधि में भगवान विष्णु की उपासना और हनुमान चालीसा का पाठ करने से विशेष फल मिलते हैं। मान्यता है कि इस दौरान हवन, भागवत कथा, रामायण पाठ और जरूरतमंदों की सहायता करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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खरमास 2025 की शुरुआत 14 मार्च को शाम 6:59 बजे से हो चुकी है। इस दौरान सूर्य ने मीन राशि में प्रवेश करेगा। इस अवधि में ग्रहों की ऊर्जा शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती, इसलिए इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। खरमास का समापन 13 अप्रैल 2025 को होगा, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेगा और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय फिर से शुरू होगा।———————***

इस अवधि में नियमित रूप से भगवान विष्णु की पूजा करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
सूर्य को जल अर्पित करें और “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक चीजों का दान करें।
यदि तीर्थ यात्रा संभव न हो, तो गंगाजल से स्नान करें।—————————-
विवाह या सगाई न करें, क्योंकि यह जीवन में अस्थिरता ला सकता है।
नया व्यवसाय शुरू करने या नया वाहन खरीदने से बचें, क्योंकि यह आर्थिक समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।
गृह प्रवेश और संपत्ति खरीदारी न करें, क्योंकि इससे परिवार में कलह और वित्तीय अस्थिरता आ सकती है।
बच्चों का मुंडन न कराएं, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।

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