सौम्य सोनी की रिपोर्ट
बदांयू 10 मार्च –होली पर महंगाई के चलते मंदा पड़ा है धंधा , आम आदमी घर के खर्चे नही चला पा रहा है, ऐसे में बदायूं यातायात विभाग ने वाहन चेकिंग के नाम पर लोगो के गले में चालान का फंदा लगा दिया है।
गरीब व्यक्ति घर के बच्चों के लिए नए कपड़े आदि लेने के लिए निकलता है पर पुलिस प्रशासन चौराहे पर रोक कर हेलमेट व बाइक के कागज ना दिखाने पर चालान काट कर उसकी व उसके बच्चों की खुशियों का गला काट देते है ।
जरूरी नहीं कि बाजार जाते वक्त हेलमेट लेकर ही निकला जाए। बेचारा गरीब असहाय व्यक्ति अपने आँसू बहाकर रह जाता है। मगर परिवहन विभाग को रहम नहीं आता।
वही दूसरी तरफ असरदार लोगों को पुलिस प्रशासन देखते भी नही है।
कि उनके पास गाड़ी के कागज है कि नही ,
हेलमेट लगाए है कि नही।
आखिर कौन है वो लोग ।
आखिर क्यों नही होता है उनका चालान ….?
क्या वो लोग शासन व प्रशासन के रिश्तेदार होते है…?
रामराज्य की सरकार में गरीब व असहाय को ही क्यों सताया जा रहा है..?
क्या अधिकारियों को इन गरीबों पर व उन के बच्चों पर दया नही आती है…?
गरीब व मध्यम वर्गीय व्यक्ति के बच्चे तो छोटी छोटी खुशियों से खुश होकर अपना जीवन काट लेते है पर शासन व प्रशासन के लोगों के बच्चों को देखिए , ये अपने बच्चों को संसार की हर खुशी देने का प्रयास करते है …
शासन व प्रशासन के लोग अपने बच्चों को जो खुशी देना चाहे वो दे पर वाहन चालान के नाम पर गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों की खुशियां मत छीने ।
लोगों का कहना है कि आपके भी बच्चे है , अगर आप अपने बच्चों को खुश देखकर खुश होते है , तो गरीब भी अपने बच्चों की खुशियों के लिए ही जीता है त्यौहारों पर इनकी व इनकी छोटे छोटे बच्चों की खुशियों में ग्रहण मत लगाए ।
अगर चालान करना जरूरी ही है तो फिर पूरी ईमानदारी से करें किसी को मत छोड़े चाहे वो कोई भी हो चेहरे देखकर चालान मत करें।
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