#फागुन
फागुन में खेलैं होरी
वृंदावन की कुंज गली में
कान्हा झूमे नाचे गायें
वृंदावन की कुंज गली में ।।
हरी भरी है धरा हमारी
खिला खिला मधुमास
रंग बिरंगे फूल खिल गये
सूरज हुआ उजास
कोयल कुहू कुहू है करती
अमिया के बौर में
होली खेलें नंद गोपाल
फागुन में वृंदावन में
गोरी झूमे नाचे गाये
वृंदावन की कुंज गली में।।
रंग गुलाल उडायें रसिया
सखियाँ छुप छुप जायें
पावों की पैजनिया बैरी
सबका पता बतायें
चोली भीगी अंगिया भीगी
हाय हाय होली में
होली खेलें नंद गोपाल
फागुन में कुंज गली में
सखी री झूमे नाचे गायें
वृंदावन की कुंज गली में।।
हरा लाल नारंगी पीला
नीला नीला अम्बर
सतरंगी सी छठा बिखर गई
होली का है मंजर
गाल गुलाबी काले नैना
दिल लूटे होली में
होली खेलें नंद गोपाल
फागुन में कुंंज गली में
हर मन झूमे नाचे गाये
वृंदावन की कुंज गली में।।
सीमाचौहान सहसंयोजक ब्रज प्रांत गंगासमग्र
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