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उझानी-बदांयू 27 जून।

जून का महीना खत्म होने को है, लेकिन उझानी क्षेत्र में मानसून की बेरुखी ने किसानों की नींद उड़ा दी है। भीषण गर्मी और आसमान से बरसती आग ने धान की नर्सरी को झुलसा दिया है। समय पर बारिश न होने से खेतों में नमी नहीं टिक रही और रोपाई का काम बुरी तरह पिछड़ गया है।
उझानी क्षेत्र के किसान रमेश पाल, सुरेंद्र सिंह और देवेंद्र यादव बताते हैं कि जून के दूसरे सप्ताह तक धान की रोपाई हो जानी चाहिए थी। लेकिन तेज धूप और लू के कारण तैयार नर्सरी पीली पड़ रही है। बार-बार पंपसेट चलाने से डीजल पर हर दिन 800-1200 रुपये तक खर्च हो रहे हैं। सिंचाई के बावजूद पौध की बढ़वार रुक गई है।
नरऊ के किसान देवेन्द्र सिंह का कहना है, खेत में पानी रुक ही नहीं रहा। सुबह सिंचाई करो, शाम तक जमीन फट जाती है। अगर 4-5 दिन में पानी न बरसा तो पूरी नर्सरी बर्बाद हो जाएगी।
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा तापमान 42-44°C धान की फसल के लिए घातक है। इस मौसम में रोपाई करने से कीट-रोग का प्रकोप बढ़ेगा और लागत दोगुनी हो जाएगी। अनुमान है कि 1 जुलाई के बाद मानसून सक्रिय हो सकता है। तब तक किसानों को इंतजार करने की सलाह दी गई है।
जिन किसानों के पास नलकूप या निजी साधन नहीं हैं, उनकी स्थिति सबसे खराब है। उझानी के बरामालदेव गांव की महिला किसान माया देवी ने बताया मजदूरी पर पंप चलवाते हैं तो 200 रुपये घंटा देना पड़ता है। इतनी महंगी खेती कैसे करेंगे।
फिलहाल उझानी क्षेत्र के हजारों किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं। हर कोई चाहता है कि इंद्रदेव जल्द मेहरबान हों, ताकि खरीफ की फसल बच सके और साल भर की मेहनत बेकार न जाए। ———
रोपाई शुरू की थी, पर पौध जल रही है। अब डीजल फूंकने के अलावा कोई रास्ता नहीं- किसान कुबेर सिंह ,नरऊ।
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नर्सरी तैयार है, पर खेत सूखे हैं। बारिश हुई तो ही कुछ होगा, वरना कर्ज में डूब जाएंगे- किसान नितिन राघव।——–
राजेश वार्ष्णेय एमके।



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