23 साल बाद सावन में नागपंचमी का महासंयोग, रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया।
सोमवार और नागपंचमी एक साथ, सिंह संक्रांति से बनेगा छत्र भंग योग: ज्योतिषाचार्य प्रवीण शर्मा।
उझानी-बदांयू 7 जून।
इस साल सावन का महीना शिवभक्तों के लिए बेहद खास रहेगा। 23 साल बाद सावन के तीसरे सोमवार को नागपंचमी का महासंयोग बन रहा है। वहीं रक्षाबंधन पर पांच साल बाद भद्रा का साया नहीं रहेगा। ज्योतिषाचार्य प्रवीण शर्मा ने बताया कि सावन के चार सोमवार में से दो बेहद दुर्लभ संयोग वाले हैं।
नागपंचमी-सोमवार एक साथ
ज्योतिषाचार्य प्रवीण शर्मा के अनुसार, सावन का तीसरा सोमवार 17 अगस्त को पड़ेगा। इसी दिन नागपंचमी भी है। आमतौर पर नागपंचमी सावन के सोमवार से आगे-पीछे पड़ती है। सोमवार और नागपंचमी का यह महासंयोग 23 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 2003 में ऐसा हुआ था। इस दिन सुबह भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से राहु-केतु के दोषों से मुक्ति मिलती है।
सिंह संक्रांति से बनेगा छत्र भंग योग
प्रवीण शर्मा ने बताया कि ज्योतिष संहिता ग्रंथ के अनुसार नागपंचमी के दिन ही सिंह संक्रांति भी पड़ रही है। श्रावण मास में सोमवार को सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश छत्र भंग योग बनाता है। इसे ज्योतिष में सत्ता परिवर्तन या बड़े राजनीतिक बदलाव का सूचक माना जाता है। हालांकि सोमवार चंद्रमा का दिन है जो मन, शीतलता और संतोष का कारक है। इससे आम लोगों के जीवन में संतोष, स्थिरता और सामाजिक समन्वय बढ़ेगा।
भद्रा मुक्त रक्षाबंधन
इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त शुक्रवार को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि पूरे दिन भद्रा नहीं लगेगी। पांच साल बाद भद्रा रहित रक्षाबंधन का संयोग बन रहा है। इससे पहले 2021 में ऐसा हुआ था।
राखी का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य प्रवीण शर्मा ने बताया कि सावन पूर्णिमा 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के कारण रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। राखी बांधने का मुख्य मुहूर्त सुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक रहेगा। भद्रा न होने से बहनें दिन भर भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।
_राजेश वार्ष्णेय एमके।



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