12:40 pm Sunday , 19 July 2026
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गुधनी में यज्ञ, सत्संग और मातृत्व दिवस पर गूंजे संस्कारों के संदेश

मां जन्म ही नहीं देती, बच्चों में संस्कार, प्रेम और नैतिकता भी पैदा करती है
गुधनी में यज्ञ, सत्संग और मातृत्व दिवस पर गूंजे संस्कारों के संदेश
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंत्र में रविवार को आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग श्रद्धा और वैदिक वातावरण के बीच आयोजित किया गया। सत्संग का संचालन अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप के निर्देशन में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अथर्ववेद के मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ द्वारा किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने आहुतियां देकर सभी के स्वस्थ, सुखी और मंगलमय जीवन की कामना की। आचार्य संजीव रूप ने कहा कि ईश्वर सदा हमारी आत्मा में विद्यमान रहता है, लेकिन अज्ञान के कारण मनुष्य उसकी अनुभूति नहीं कर पाता। उन्होंने कस्तूरी मृग का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार हिरण अपनी नाभि की सुगंध को बाहर खोजता फिरता है, उसी प्रकार मनुष्य भी भगवान को बाहरी दुनिया में तलाशता है, जबकि ईश्वर उसके भीतर ही मौजूद रहता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य कोई गलत कार्य करने जाता है तो उसके भीतर भय, शंका और लज्जा जैसे भाव उत्पन्न होते हैं, जबकि अच्छे कार्य करने पर निर्भयता, उत्साह और आनंद की अनुभूति होती है। मातृत्व दिवस पर बोलते हुए उन्होने कहा कि मां केवल जन्म देने वाली ही नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर संस्कार, प्रेम और नैतिकता का बीज बोने वाली प्रथम गुरु होती है। मां का सम्मान और सेवा करना प्रत्येक व्यक्ति का सबसे बड़ा धर्म है। डॉ. सत्यम आर्य ने यज्ञ संपन्न कराया और यज्ञ को सर्वोत्तम चिकित्सा पद्धति बताते हुए उसके वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस मौके पर राकेश आर्य, विचित्रपाल सिंह, सचिन आर्य, गुड्डू देवी, सूरजवती देवी, सुरजा देवी एवं कौशिकी रानी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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