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कछला गंगा घाट: आस्था तार-तार, गंगाजल में वाहन धुलाई और मौत के स्टंट

कछला गंगा घाट: आस्था तार-तार, गंगाजल में वाहन धुलाई और मौत के स्टंट।

उझानी-बदांयू 4 मई

पवित्र गंगा नदी के कछला घाट पर आस्था और पर्यावरण दोनों से खुला खिलवाड़ हो रहा है। यहां श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली दो बड़ी लापरवाहियां लगातार जारी हैं।

घाट पर लोग खुलेआम अपनी कार और बाइक गंगा में धोते नजर आ रहे हैं। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि पवित्र नदी को वाहन धुलाई केंद्र की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। वाहनों से निकलने वाला तेल, ग्रीस और केमिकल सीधे गंगा में मिल रहा है, जिससे जल प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।

राजस्थान, यूपी और एमपी से लाखों श्रद्धालु यहां आचमन और स्नान के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में गंगाजल में वाहन धोना करोड़ों लोगों की आस्था पर सीधी चोट है।

सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ में युवा गंगाजल में मोटरसाइकिल दौड़ाकर खतरनाक स्टंट कर रहे हैं। इतना ही नहीं, रेलवे पुल की बीम पर चढ़कर छलांग लगाना, ट्रैक पर दौड़ना और रस्सी के सहारे पुल पर चढ़ने के वीडियो भी सामने आए हैं।

सबसे डराने वाला आंकड़ा ये है कि जनवरी से अब तक गंगा में डूबकर 20 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। इनमें भरतपुर, मथुरा और आसपास के जिलों के लोग भी शामिल हैं।

अक्टूबर 2025 में बरेली से आए श्रद्धालुओं की ईको कार धोते समय गंगा की तेज धारा में बह गई थी। घाट पर मौजूद गोताखोरों और नाविकों ने फुर्ती दिखाकर रस्सी की मदद से कार को बाहर निकाला, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की नाक के नीचे ये ‘मौत का खेल’ चल रहा है। सावन में कांवड़ियों की भीड़ के बीच रील बनाने की होड़ और बढ़ जाती है।

CPCB , केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट भी चिंताजनक है: यूपी में बिजनौर और गढ़मुक्तेश्वर को छोड़कर ज्यादातर जगह गंगाजल पीने लायक नहीं बचा। कछला घाट पर भी pH वैल्यू तय मानक से ज्यादा है। NGT राष्ट्रीय हरित अधिकरण पहले ही कह चुका है कि गंगा में 50% गैर-शोधित सीवेज बहाया जा रहा है।

श्रद्धालु और स्थानीय लोग प्रशासन से तुरंत सख्त कार्रवाई, घाट पर स्थायी पुलिस चौकी और CCTV निगरानी की मांग कर रहे हैं, ताकि आस्था और जिंदगी दोनों बचाई जा सकें।


राजेश वार्ष्णेय एमके।

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